राजगीर जू सफ़ारी में मलमास मेले के लिए भीड़ नियंत्रण की तीव्र तैयारियां
बिहार के राजगीर में स्थित जू सफ़ारी ने आगामी मलमास मेले में प्रत्याशित भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए विस्तृत सुरक्षा और व्यवस्थापन योजना तैयार कर ली है। यह पहल वन विभाग, स्थानीय पुलिस, नगर निगम और निजी सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य दर्शकों की सुरक्षा और वन्यजीवों की शांति बनाये रखना है।
प्रशासन के प्रमुख ने बताया कि पिछले वर्षों में मेले के दौरान ट्रैफिक जाम, कचरे का अनियंत्रित सृजन और असंयमित भीड़ के कारण कई बार सुविधाएँ बाधित हुई थीं। इस बार ‘भीड़ प्रबंधन टीम’ को चार पाँच अनुभवी अधिकारी, 150 पुलिस कर्मी और 200 स्वयंसेवी गाइडों के साथ तैनात किया गया है। उनके काम में प्रवेश द्वार पर नॉन‑टच टोकन प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी, उच्चतम गति वाले रैपिड मीटिंग पॉइंट्स, और आपातकालीन मेडिकल कैंप की स्थापना शामिल है।
परिधि में लचीले बैनर, अस्थायी टेंट और जल व्यवस्था के साथ-साथ कचरा संग्रहण के लिए डस्टबिनों को हर 100 मीटर पर रखा गया है। अधिकारियों ने कहा, “यदि भीड़ इतनी तेज़ी से बढ़े कि जू के शेर भी शोर से परेशान हो जाएँ, तो हमें तुरंत नियंत्रण स्तम्भ सक्रिय करने होंगे।” यह टिप्पणी, हल्के‑फुल्के व्यंग्य के साथ, प्रशासन की गंभीरता को दर्शाती है।
रवादा किया गया है कि मेले के मुख्य प्रवेश द्वार से निकटतम रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड तक विशेष शटल सेवाएँ चलाई जाएँगी, जिससे निजी वाहन पर निर्भरता घटेगी। साथ ही, स्थानीय व्यवसायियों को निर्धारित समय‑स्लॉट के अनुसार स्टॉल लगाने की अनुमति दी जाएगी, जिससे ट्रैफ़िक की निरंतरता बनी रहेगी।
नागरिकों की प्रतिक्रिया मिश्रित है। कुछ लोग इसे “सुरक्षा की नई मानक” मान रहे हैं, जबकि कुछ विक्रेताओं ने कहा कि प्रतिबंधित समय‑स्लॉट के कारण उनकी आय पर असर पड़ सकता है। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि अनुष्ठान‑सम्बंधी विक्रेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी और आवश्यक वाणिज्यिक समर्थन प्रदान किया जाएगा।
सारांश में, राजगीर जू सफ़ारी ने मलमास मेले को आनंददायक, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार कर ली है। इसका असर न केवल दर्शकों के अनुभव पर बल्कि वन्यजीवों के जीवन में भी सुधर लाने की संभावना रखता है। यदि सभी पक्ष इस योजना के अनुसार सहयोग करें, तो यह मेले का इतिहास बना सकता है—‘सुरक्षित उत्सव, शांत जंगली जीवन’।
Published: May 5, 2026