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राज्य सरकार केंद्र से विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण बढ़ाने की स्वीकृति मांगेगी

राज्य सरकार ने आज बीते दोपहर केंद्र के मुख्य सचिव को एक लिखित नोटिस भेजने का इरादा घोषित किया, जिसमें विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए कोटा बढ़ाने की अनुमति मांगी गई है। वर्तमान में राज्य के विधायी सभा में 5 प्रतिशत सीटें ST वर्ग को सुरक्षित हैं; सरकार का प्रस्ताव इसे 10 प्रतिशत तक ले जाने का है।

यह कदम पिछले साल राज्य में आयोजित कई सार्वजनिक सुनवाइयों और tribal संगठनों की अधिसूचना के बाद आया है, जहाँ कई प्रतिनिधियों ने कहा कि मौजूदा आरक्षण जनसंख्या के वास्तविक अनुपात से काफी कम है। इन मांगों को समर्थन में, जिले‑दर‑जिला कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने एकत्रित तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें जनगणना आँकड़े, पिछड़ी हुई बुनियादी सुविधाएँ और शिक्षा व स्वास्थ्य में गिरावट के संकेत दर्शाए गये।

हालांकि, विपक्षी दल इस प्रस्ताव को आगामी विधानसभा चुनावों के समय‑सापेक्ष वोट‑बैंक राजनीति का साधन मानते हुए तीखी आलोचना कर रहा है। उनका तर्क है कि सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को राजनीति के झंडे के नीचे लपेट कर, सरकार केवल अपने मताधार समूह को विस्तारित कर रही है। इस पर सरकारी प्रवक्ता ने कहा, “सामाजिक समानता एक दीर्घकालिक नीति है, चुनावी समय‑सीमा इसका मानदण्ड नहीं हो सकती।”

केंद्र से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करने के लिये, राज्य ने पहले एक विशेषज्ञ समिति गठित की, जिसने संविधान संशोधन (अनुच्छेद 332) तथा संबंधित विधायी प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा की। समिति ने निकट भविष्य में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का वचन दिया, जिसमें संभावित वित्तीय प्रभाव, सीट पुनः वितरण की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के सहयोगी प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है।

यदि केंद्र इस अनुरोध को मान्यता देता है, तो अगले वर्ष के मध्य में एक विधायी संशोधन के अंतर्गत नई सीटों का आवंटन किया जाएगा। इससे सीधे‑सिधे तौर पर लगभग पाँच लाख ST जनसंख्या को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा, जबकि यह अतिरिक्त सीटें मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में कुछ परिवर्तन भी लेकर आएँगी। वहीं, यदि अनुरोध का खारिज जवाब आता है, तो राज्य सरकार को अपनी नीति‑रूपरेखा को पुनः स्वरूपित करना पड़ेगा, जिससे संभावित सामाजिक दबाव और वैकल्पिक न्याय उपायों का मार्ग खुल सकता है।

अंततः यह मामला इस बात का परीक्षण है कि विभिन्न स्तरों पर बहु‑स्तरीय प्रशासनिक संवाद कितनी जल्दी सामाजिक असमानताओं को सुलझा सकता है, जबकि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की गंभीरता और चुनावी समयसारिणी के बीच संतुलन बनाए रखता है।

Published: May 5, 2026