जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: शहर

रांची में ‘संघर्ष हीरे’ की परिभाषा में विस्तार पर कड़ी चर्चा, प्रशासनिक कदमों की जांच

रांची नगर निगम एवं स्थानीय पुलिस ने कल आयोजित विशेष बैठक में ‘संघर्ष हीरे’ की परिभाषा को चौड़ा करने का प्रस्ताव रखा। यह कदम, जिसे नगर विकास प्राधिकरण के मुखिया शशि मल्होत्रा ने "अवैध खनन को जड़ से खत्म करने" का मकसद बताया, शहर के कई दिलचस्प पहलुओं को उजागर करता है।

बैठक में पुलिस आयुक्त अजय सिंह ने बताया कि वर्तमान नियम केवल उन हीरों को प्रतिबंधित करता है, जो सीमा पार अधिग्रहण के माध्यम से लाए जाते हैं। हालांकि, शहर के कई छोटे-छोटे गहना विक्रेता और स्थानीय जौहरी संघ का मानना है कि कई हीरे, जो निकटवर्ती इलाकों में अनधिकृत खानन से निकले हैं, वर्तमान में इस वर्गीकरण में नहीं आते। इससे रिचिंग मैट स्ट्रेस पर दबाव बना रहता है, और कभी‑कभी फॉर्म भरने का काम भी "पूरा कागज़ी पहाड़" बन जाता है।

जौहरी संघ के अध्यक्ष रवींद्र कुमार ने कहा, "अगर परिभाषा में बदलाव किया गया तो हमारे कई वैध सौदे भी अनियंत्रित हो जाएंगे, जिससे छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त दस्तावेज़ी कार्य और अनावश्यक देनदारियों का सामना करना पड़ेगा।" इसके खिलाफ नगर निगम के वित्त विभाग ने सुझाव दिया कि विस्तार से शोषण रोकने के साथ‑साथ वैध व्यापार पर अत्यधिक बोझ न पड़े, इसके लिए एक मध्यवर्ती नियम बनाया जाए।

सिविल सोसाइटी समूह "पर्यावरण एवं सभ्यता" के प्रमुख मनोहर त्रिपाठी ने इस प्रस्ताव की विडंबना पर प्रकाश डाला। "शहर में जल संकट, कूड़ादान की कमी और सड़कों की खराबी जैसी प्राथमिक समस्याएं हैं, जबकि अधिकारी हीरे के फ़ॉर्म पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।" उन्होंने कहा, "अगर यह निर्णय आश्चर्यजनक रूप से लागू हो गया तो नागरिकों को नियम पालन के लिये नई क्यूपी और महंगे कंसल्टेंट फीस का सामना करना पड़ सकता है।"

सर्वेक्षण के अनुसार, रांची में वार्षिक 250 करोड़ रुपये का हीरे का व्यापार होता है, जिसमें से लगभग 15% को अनधिकृत मान्या जाता है। प्रशासन का अंदाज़ा है कि विस्तारित परिभाषा से इस अवैध हिस्से को 5-7% तक घटाया जा सकता है, जबकि वैध व्यापारिक गतिविधियों को न्यूनतम असर होगा। लेकिन आलोचक कहते हैं कि यह अनुमान अतिशयोक्तिपूर्ण है, क्योंकि नेक्सस पॉलिसी में अक्सर नियामक तंत्र की अक्षमता स्पष्ट होती रही है।

निर्णय अंतिम रूप से अगले महीने होने वाले मुख्यमंत्री परिषद (KP) मीट में लिया जाएगा। इस दौरान, नगर निगम ने एक कार्यसमिति गठन करने का प्रस्ताव रखा है, जो विभिन्न हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श कर सके। यदि इस काम में भी विशेष ध्यान नहीं दिया गया तो बहस का आकार बढ़ता रहेगा, और रांची के नागरिकों को फिर से कागज़ी कार्यवाही के सागर में तैरते देखना पड़ सकता है।

Published: May 6, 2026