येरू में बाघ की वापसी के बाद भी वन्यजीवों की संख्या 2024 से नीची बनी
पुणे के निकट स्थित येरू वन क्षेत्रों में एक वर्ष बाद बाघ की फिर से पहचान हुई, परन्तु पूरे क्षेत्र की वन्यजीव जनसंख्या 2024 में दर्ज की गई संख्याओं से काफी कम रही। यह आंकड़ा स्थानीय वन विभाग और नगर प्रशासन द्वारा आयोजित वार्षिक सर्वेक्षण में स्पष्ट है।
पिछले साल, येरू में बाघ की उपस्थिति को वन्यजीव संरक्षण की एक सकारात्मक संकेत मानते हुए स्थानीय प्रशासन ने संवर्धन उपायों का वादा किया था। लेकिन इस वर्ष के सर्वेक्षण ने दिखाया कि हिरण, सॉन्डर, मैक्सिकन कोबरा सहित कई प्रमुख प्रजातियों की संख्याओं में निरंतर गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिक्रमण, अपर्याप्त सुरक्षा उपाय और वन्यजीव शिकार के मामलों में कमी न लाने वाली नीतियों ने इस गिरावट को तेज़ कर दिया है।
येरू में मानवीय बस्ती का विस्तार लगातार बढ़ रहा है, जिससे वन के सीमे पर ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण बढ़ा है। स्थानीय पुलिस ने इस वर्ष केवल दो ही वन्यजीव शिकार के मामलों की रिपोर्ट दर्ज की, जबकि वन विभाग के अनुसार वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है। इस सन्दर्भ में प्रशासन की निगरानी क्षमताओं पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए पर्यावरणविदों ने कहा, “यदि बाघ जैसी शीर्ष प्रजाति फिर भी यहाँ लौट आती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में मानव हस्तक्षेप बंद हो गया है।”
आगामी महीने में नगरपालिका द्वारा बाघ-पर्यटकों के लिए विशेष मार्ग और सूचना सेंटर स्थापित करने की योजना है, परन्तु यह योजना व्यापक पारिस्थितिक पुनर्स्थापना के उपायों के बिना अधूरी प्रतीत होती है। सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय मतदाता दोनों ही उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस वर्ष न केवल बाघ के लिये बल्कि सम्पूर्ण जैव विविधता के लिये एक व्यवस्थित, वैज्ञानिक‑आधारित पुनरुद्धार योजना तैयार करेगा।
Published: May 4, 2026