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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी पात्रों को आयुष्मान कार्ड दिलवाने का निर्देश दिया
उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी अदित्यनाथ ने आज सुबह राज्य के स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और स्थानीय प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों को आपात बैठक बुलाते हुए सभी पात्र नागरिकों को आयुष्मान भारत कार्ड जारी करने का अनिवार्य निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अब तक 1.5 करोड़ से अधिक लोगों को कार्ड मिला है, पर अभी भी 2 करोड़ से अधिक वर्गीय पात्रता वाले लोगों को इस लाभ से वंचित रखा गया है।
आयोग ने यह बताया कि आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वरिष्ठ नागरिक, एचआईवी, ट्यूबरकुलोसिस, कैंसर और अन्य 23 प्राथमिक बीमारियों के उपचार हेतु ₹5 लाख वार्षिक वित्तीय सहायता देना है। यूपी में इस योजना का नियोजनीय कवरेज 45% से 55% तक बढ़ाना प्राथमिक लक्ष्य है, जो राष्ट्रीय औसत से कई दशांश नीचे रहा है।
मुख्य मंत्री ने इस दिशा में कई कदमों का हवाला दिया:
- नवीनतम आधार-निर्दिष्ट डाटाबेस के साथ डुप्लिकेशन को समाप्त करने के लिए सभी तहसीली कार्यालयों में समन्वित सत्यापन प्रक्रिया लागू करना;
- डिजिटल पोर्टल का 24‑घंटे खोलना, जिससे नागरिक स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कर सकें और एप्लीकेशन की स्थिति ट्रैक कर सकें;
- पांच जिले में पंजीकरण काउंटरों की संख्या दोगुनी करना तथा ग्राम पंचायत स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को कार्ड वितरण के लिए प्रशिक्षित करना;
- नए साल के भीतर सभी जिलों में ‘सिंगल विंडो कार्डिंग’ केंद्र स्थापित करना, ताकि ‘कहीं न पहुँचे’ का बोझ हटे;
- कार्ड न मिलने वाले मामलों में जिला स्तर पर त्वरित शिकायत निवारण इकाई (एसएचआर) स्थापित करना, जिसके साथ गैर‑अनुपालन पर प्रशासनिक दंड निर्धारित करना।
इन आदेशों के पीछे प्रशासनिक तर्क सहज है: आयुष्मान भारत के तहत अस्पतालों की पहुंच और खर्चों की निगरानी के लिए डेटा सटीकता अनिवार्य है। हालांकि, पिछले दो वर्षों में कुछ जिलों में डुप्लिकेट कार्ड, असत्य दस्तावेज़ और आंशिक डेटाबेस अद्यतन की खबरें मिली हैं। कुछ सामाजिक संगठनों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कुछ वंचित वर्गों को दस्तावेज़ी जटिलताओं के कारण पंजीकरण में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
विचार-विमर्श के दौरान, मुख्य मंत्री ने कहा, “अधिकारी वर्गीय लाभ को दिये गए अधिकार का दायित्व नहीं समझते, बल्कि इसे एक ‘सेवा’ मानते हैं। इस सोच को बदलना होगा। यदि कोई भी पात्र व्यक्ति अपना कार्ड नहीं पाता, तो यह न केवल योजना का व्यर्थ होना दर्शाता है, बल्कि सरकार की विश्वसनीयता को भी धूमिल करता है।” यह फॉर्मल भाषा के बीच सूक्ष्म व्यंग्य का संकेत देता है कि कई बार प्रशासनिक लापरवाहियाँ नीति के लक्ष्य को ही उलट देती हैं।
कार्ड वितरण में तेज़ी लाने के लिए तकनीकी सहयोग भी मांगा गया। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन लिमिटेड (UPETL) से डेटा एंटीवायरस, क्लाउड‑बैकअप और रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। परन्तु बजट प्रतिबंध, साक्षरता स्तर और ग्रामीण बुनियादी ढांचे की असमानता जैसे मूलभूत चुनौतियों ने इस अभियन को ‘सपना-दुखी’ बना दिया।
नागरिक स्तर पर इस कदम के संभावित प्रभाव को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापक कार्ड कवरेज से अस्पताल में अचानक बढ़ते कंज़्यूमर वॉल्यूम को संभालने की क्षमता में सुधार होगा, जबकि अभावग्रस्त क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की कमी अभी भी चुनौती बनी रहेगी। ‘कुल मिलाकर’, यदि यहाँ के अधिकारी इस आदेश को केवल पेपर पर नहीं, बल्कि उपलब्धियों में बदलने में सफल हो जाएँ, तो उत्तर प्रदेश आयुष्मान भारत के लिये एक मॉडल राज्य बन सकता है। अन्यथा, यह आदेश केवल एक और लाल स्याही वाला नोटिस रहेगा, जिसे समय के साथ धूल झड़ाने का इंतजार रहेगा।
Published: May 7, 2026