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योगी सरकार ने गोरखपुर के दक्षिणी क्षेत्र में ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने गोरखपुर जिले के दक्षिणी मंडल में ग्रामीण मार्गों के विस्तार के लिए एक तेज़ गति से कार्य योजना प्रस्तुत की। सार्वजनिक कार्य विभाग (PWD) और ग्रामीण विकास विभाग ने मिलकर 400 किलोमीटर नई पक्की सड़कें बनाना तय किया, जिसमें 150 ग्रामों को प्रमुख बाजारों और स्वास्थ्य केंद्रों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
परियोजना के तहत दो साल में लगभग 1,200 लाख रुपये के अनुमानित खर्च को राज्य तथा केंद्र के गती‑शक्ति योजना के फंडों से पूरा किया जाएगा। इस वित्तीय ढांचे को देखते हुए, अधिकारी बताते हैं कि औसत लागत प्रति किलोमीटर 10 लाख रुपये रखी गई है, जो राष्ट्रीय औसत से थोड़ा अधिक है — संभवतः कठोर गुणवत्ता मानकों के कारण।
जिलाध्यक्ष, जिला तालुका अधिकारी और स्थानीय सांसद इस कार्य में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंदरगाह‑जैसे गाँवों को अस्थायी बिचौड़े रोड से मुक्त किया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादों की त्वरित बिक्री और स्कूल‑कॉलेज के छात्रों की रोज़ाना यात्रा आसान होगी। फिर भी, कुछ ग्रामीण समूहों ने भूमि अधिग्रहण और जल निकासी व्यवस्था पर अन्तिम चरण में उच्चारण किया है, जिससे कार्यशिक्षा की गति में कभी‑कभी बाधा आती दिखती है।
वास्तविक लाभ की बात करें तो इस महीने में ही 30 किलोमीटर नई सड़क का नियमित उपयोग शुरू हो चुका है। स्थानीय किसान रघुनाथ सिंह ने बताया, "पहले कच्ची सड़क पर ट्रैक्टर की धक्के धक्के गति से हम बाजार तक पहुँचना मुश्किल मानते थे, अब समय की बचत के साथ फसल की बर्बादी भी घटेगी।" वहीं, स्वास्थ्य सेवा केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनीता देवी ने कहा, "रात के समय भी एम्बुलेंस अब बिना जटिलता के चल सकेगी, यह एक बड़ा सुधार है।"
पर आलोचनात्मक नजरिए से देखें तो कई विशेषज्ञ इस पहल को चुनावी रैली के रूप में देख रहे हैं। कुछ ने इंगित किया कि पूर्व में कई समान योजनाओं की घोषणा होने के बावजूद सड़कों की गुणवत्ता और रख‑रखाव में कमी रही है। "भविष्य में पिचाई हुई सतह पर गड्ढे न हों, इसके लिए निरंतर निगरानी और जल निकासी व्यवस्था जरूरी है," एक बुनियादी ढाँचा विशेषज्ञ ने टिप्पणी की।
सारांशतः, गोरखपुर के दक्षिणी मंडल में ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी का विस्तार एक उल्लेखनीय कदम है, जो कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में तुरंत प्रभाव डालता दिख रहा है। हालांकि, सफलता की कहानी तभी पूर्ण होगी जब निर्माण के बाद रख‑रखाव, जल प्रबंधन और नागरिक सहभागिता को भी समान महत्व दिया जाए।
Published: May 8, 2026