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Category: शहर

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महाराष्ट्र सीईटी में 88% छात्र उपस्थित, परीक्षा संचालन पर सवाल

राज्य स्तर पर आयोजित महाराष्ट्रीयन कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) में इस वर्ष 88% अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई। कुल 2.56 लाख पंजीकृत उम्मीदवारों में से 2.25 लाख ने परीक्षा दी, जो पिछले वर्ष की 81% उपस्थिति से स्पष्ट उछाल है। यह आंकड़ा न केवल शैक्षणिक उत्साह को दर्शाता है, बल्कि परीक्षाओं के आयोजन में उठे व्यावहारिक प्रश्नों को भी उजागर करता है।

पुमा, मुंबई, नागपुर और अकोला जैसे प्रमुख शहरों में 200 से अधिक परीक्षा केंद्र कार्यरत थे। प्रशासन ने सुरक्षा, डिजिटल मॉनिटरिंग और समयबद्ध एंट्री-एक्ज़िट नियंत्रण के लिए नए आदेश जारी किए। हालांकि, कई वार्डों में आने वाली भीड़ और पर्याप्त पार्किंग की कमी ने स्थानीय जनसंख्या पर अतिरिक्त दबाव डाला। कुछ केंद्रों पर एसी प्रणाली की खामी और प्रॉक्सी सर्वर की धीमी गति के कारण तकनीकी खामियां भी सामने आईं।

शिक्षा विशेषज्ञों का तर्क है कि उच्च उपस्थिति दर के पीछे दो मुख्य कारण हैं: राज्य सरकार की जागरूकता अभियानों का विस्तार और अभिभावकों द्वारा शिक्षा को आर्थिक सुरक्षा के प्रमुख साधन के रूप में मानना। वहीं, अभ्यर्थियों पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण मानसिक तनाव और तैयारी की महंगाई भी बढ़ी है। कई माता-पिता ने बताया कि उन्होंने परीक्षा के लिये अतिरिक्त कोचिंग में औसत 15,000 रुपये प्रति माह खर्च किए, जिससे मध्यम वर्ग के लिए बोझ बढ़ा।

प्रशासन की ओर से कहा गया कि इस वर्ष 'डिजिटल एरोज़' को कम करने हेतु ऑनलाइन पंजीकरण, ए-प्रूफिंग और QR कोड आधारित हॉल प्रवेश लागू किया गया। फिर भी, कुछ बंदरगाहों में नेटवर्क डाउntime ने अभ्यर्थियों को देर तक निर्धारित समय पर पहुँचने से रोका। यह दिखाता है कि तकनीकी निवेश के बावजूद, बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी पर ध्यान देना अभी भी आवश्यक है।

स्थानीय समाचार एजेंसियों ने यह भी रिपोर्ट किया कि कई परीक्षा केंद्रों के पास आश्रित सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट की कमी के कारण देर से पहुँचने वाले छात्रों को शंका में डाले बिना ही अतिरिक्त सुविधाएँ नहीं मिल पाईं। इस संदर्भ में नगर प्रशासन को न सिर्फ परीक्षा केंद्रों की जगह, बल्कि उनके परिवहन कनेक्शन को भी रणनीतिक रूप से पुनःपरिकल्पित करने की जरूरत है।

समग्र रूप से, 88% उपस्थिति का आंकड़ा महाराष्ट्र में शैक्षणिक आकांक्षाओं की तीव्रता को दर्शाता है, पर साथ ही यह भी बताता है कि परीक्षा प्रबंधन के बुनियादी पहलुओं में सुधार की गुंजाइश अभी बाकी है। प्रशासन को तकनीकी, लॉजिस्टिक और सामाजिक स्तर पर एकीकृत रणनीति अपनाने की आवश्यकता है, ताकि अगली बार हाई स्टेक्स वाली परीक्षाएँ न केवल बड़े पैमाने पर आयोजित हों, बल्कि अभ्यर्थियों के लिए सुगम और न्यायसंगत भी बनें।

Published: May 9, 2026