महाराष्ट्र में सेक्स अपराधियों की पैरॉल रोकने हेतु कड़े नियम तैयार करने का आदेश
पुणे के भोरे तहसील के नर्सापुर गाँव में 1 मई को 4 वर्षीया बच्ची की हत्या‑कामेरा मामला दु:खद रूप में सामने आया। मामले में मुख्य आरोपी 65 वर्षीया पूर्वविकासवादी पर पिछले जुर्माने की पृष्ठभूमि के साथ दोहरावदार लैंगिक अपराध का आरोप है। इस दुर्घटना के बाद महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री ने आपातकालीन निर्देश जारी कर, सभी विभागीय अधिकारियों से सेक्स अपराधियों की पैरॉल को समाप्त करने के लिये कठोर नियमावली का मसौदा तैयार करने का आदेश दिया।
मुख्य मंत्री ने कहा कि ‘जब तक अपराधियों को समाज में पुनः प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक जनता का भरोसा और सुरक्षा दोबारा स्थापित नहीं हो पाएगी।’ यह बयान सरकार के अपराध निवारण के वादे को दोबारा सुदृढ़ करता है, पर साथ ही राज्य के न्यायिक प्रक्रिया में स्थगित हो रहे सुधारों की गति पर भी सवाल उठाता है।
नियुक्त राज्य विधि विभाग, गृह मंत्रालय और जेल प्रबंधन प्राधिकरण को एक साथ मिलकर इस दिशा‑निर्देश को 30 दिनों के भीतर अंतिम रूप देना होगा। मसौदा तैयार होने पर इसे विधि सभा में प्रस्तुत कर, मौजूदा पैरॉल नियमों में संशोधन किया जाएगा। यह कदम, जहाँ अपराधियों को सुरक्षित राह दिखाने के उद्देश्य से पैरॉल प्रणाली की लचीलापन को सीमित करता है, वहीं यह भी दर्शाता है कि स्थानीय प्रशासन को अक्सर सामुदायिक भावनाओं के दबाव में कार्य करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों ने इस कदम की सराहना के साथ ही यह भी कहा कि न केवल ‘कठोर नियम’, बल्कि मौजूदा पुलिस पकड़, जलती हुई रिपोर्टिंग तंत्र, और पीड़ितों के पुनरुद्धार के लिये सुदृढ़ संसाधनों की आवश्यकता है। वर्तमान में, विरोधी समूहों ने यह संकेत दिया है कि केवल कागज पर नियम बनाकर वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, जब तक कि कार्यान्वयन स्तर पर पारदर्शिता और उत्तरदायित्व नहीं कायम हो।
प्रशासनिक कदमों के बावजूद, नर्सापुर के ग्रामीणों में इस हिंसा का गहरा दाग बना हुआ है। कुछ स्थानीय नेता कह रहे हैं कि ‘सिर्फ कागज पर लिखे शब्द ही नहीं, बल्कि हर पैरॉल के पीछे की जाँच, पुनर्वास प्रक्रिया और समाज में पुनर्स्थापना की दिशा में ठोस कार्रवाई ही इस दर्द को कम कर सकती है।’
महाराष्ट्र सरकार का यह नया कदम, सामाजिक सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है, परंतु यह भी स्पष्ट करता है कि न्याय प्रणाली में संतुलन बनाने की प्रक्रिया – सख्त दंडन, पुनर्वास, और पुनरावृत्ति रोकथाम – अभी भी एक चुनौतीपूर्ण यात्रा है।
Published: May 6, 2026