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महाराष्ट्र में बिना सरकारी निरीक्षण के आयोजित मेडिकल प्रवेश दौर को रद्द करने का प्रस्ताव
मुंबई (बीबीसी) – महाराष्ट्र ने हाल ही में एक अनियंत्रित चिकित्सा प्रवेश प्रक्रिया को समाप्त करने का निर्णय लिया है। पिछले महीने निजी परामर्श समिति द्वारा आयोजित इस दौर में 12,000 से अधिक अभ्यर्थियों को असंगत आधार पर सीटें आवंटित की गई थीं, जबकि राज्य सरकार और मेडिकल काउंसिल के कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं थे।
परामर्श प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उभरे: शुल्क का दोगुना होना, मेरिट लिस्ट में छुपे हुए नाम और ऑनलाइन पोर्टल की बार‑बार बंद हो रही सेवा। अभ्यर्थियों ने इस बात पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की कि “भविष्य की डॉक्टरियों को ‘बिकास’ के नाम पर ‘विकास’ के बहाने बेच दिया गया”. एक छात्र समूह ने दिल्ली उच्च न्यायालय में मुकदमा दायर किया, जिसमें उनका दावा था कि बिना सरकारी एग्रीमेंट के यह प्रवेश प्रक्रिया शैक्षिक अनुबंध का उल्लंघन करती है।
इन घटनाओं के प्रकाश में, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि “सभी मेडिकल प्रवेश प्रक्रियाओं में गोपनीयता, पारदर्शिता और न्यायिक देखरेख को अनिवार्य किया गया है”. विभाग ने बताया कि अगले दो हफ्तों के भीतर वह एक पुनःनिर्धारित, राज्य‑अधीकृत प्रवेश राउंड आयोजित करेगा, जिसमें मर्यादा आयोग और मेडिकल शिक्षा पोर्टल के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
यह कदम प्रशासनिक लापरवाही को थोड़ा कम नहीं करता, बल्कि यह दिखाता है कि “निगरानी” शब्द को अब प्रयोग में लाने के बाद ही उसे लागू किया जा रहा है। जमीनी स्तर पर, हजारों अभ्यर्थियों को अब अतिरिक्त तैयारी के लिए दो‑तीन महीने अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे, जबकि कई ने पहले ही निजी कोचिंग में भारी निवेश किया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अनियमित प्रक्रियाएँ न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढाँचे को भी क्षतिग्रस्त करती हैं। यदि प्रवेश प्रक्रिया में शून्य‑से‑शून्य पारदर्शिता बनी रहती है, तो अगली पीढ़ी के डॉक्टरों के प्रशिक्षण में अड़चनें पैदा होना तय है।
सरकार ने इस राउंड को ‘रद्द’ शब्द के साथ समाप्त कर दिया है, पर यह सवाल अभी खुला है कि क्या अगले चरण में वही गड़बड़ियों को दोहराया जाएगा या वास्तव में एक भरोसेमंद, निगरानी वाला ढाँचा स्थापित किया जाएगा। वर्तमान में, अभ्यर्थी और उनके माता‑पिता दोनों ही इस बात की आशा में हैं कि “सही निगरानी” के साथ उनका भविष्य सुरक्षित हो।
Published: May 7, 2026