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महाराष्ट्र में 10,000 शिक्षक पदों के लिए 1.7 लाख से अधिक अभ्यर्थी

महाराष्ट्र सरकार ने इस वर्ष सार्वजनिक और aided स्कूलों में 10,000 शिक्षक पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इन पदों के लिये कुल 1.73 लाख से अधिक योग्य अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, जिससे चयन प्रक्रिया की जटिलता स्पष्ट हुई।

उपलब्ध डेटा से पता चलता है कि अभ्यर्थियों का अधिकांश भाग 30‑45 वर्ष की आयु वर्ग में है, जिनमें से अधिकांश ने यूजीसी‑निहित परीक्षा या राज्य स्तर की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास की है। लेकिन इतने बड़े प्रतिस्पर्धी समूह को एक साथ प्रोसेस करना, प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा परीक्षण बन गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, मेज पर मौजूद 10,000 पदों का आवंटन पहले के साल की तुलना में 25 % अधिक है, जबकि पूर्व वर्षों में पदभरण दर लगभग 70 % रही है। इस साल का चयन अनुपात लगभग 0.58 % (लगभग 5770 में से 33) के आसपास रहने की संभावना है, जो नौकरियों की कमी और अभ्यर्थी-प्रेरित दबाव दोनों को उजागर करता है।

शिक्षा विभाग के एक spokesperson ने कहा कि प्राथमिकता योग्यता, अनुभव और क्षेत्रीय संतुलन को देखते हुए एक परतदार स्क्रीनिंग मॉडल अपनाया गया है। प्रारम्भिक दस्तावेज़ जाँच के बाद, लगभग 30 % उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के लिए बुलाया गया, फिर शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों को साक्षात्कार और मेरिट सूची में शामिल किया जाएगा। लेकिन प्रक्रिया में देर से विज्ञापन और तकनीकी गड़बड़ी के कारण कई अभ्यर्थी ने आवेदन जमा करने के समय सीमा को लेकर असंतोष जताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदन मिलने से चयन की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। "एक ही समय में लाखों अभ्यर्थियों को छांटना आसान नहीं है, और अगर टर्नअराउंड समय कम किया गया तो शिकायतें बढ़ सकती हैं," एक शिक्षा नीति विश्लेषक ने टिप्पणी की। साथ ही, यह भी आशंका है कि अनुभवी शिक्षकों की कमी को भरने के लिये तेज़ी से चयन करने से विद्यालयों की पाठ्यक्रम गुणवत्ता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

स्थानीय नागरिकों के बीच इस नीति पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखी जा रही है। अभिभावकों ने दीर्घकालिक शिक्षक अभाव को दूर करने के लिये इस कदम की सराहना की, जबकि अभ्यर्थियों ने प्रक्रिया के पारदर्शिता और समयबद्धता की मांग की। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट यह दर्शा रहे हैं कि "शिक्षा का अधिकार सबको मिले, लेकिन चयन की प्रक्रिया में भी न्याय हो"।

आगे देखते हुए, राज्य सरकार को मौजूदा बुनियादी ढाँचा—जैसे ऑनलाइन पोर्टल, आवेदन ट्रैकिंग और परीक्षा केंदरों—को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। यदि यह कदम सफल होता है, तो 2026‑27 शैक्षणिक सत्र में नई भर्ती के साथ कुछ स्कूलों में शिक्षक‑छात्र अनुपात सुधार सकता है। अन्यथा, अनिवार्य रूप से नई नियुक्तियों के बाद भी कई विद्यालयों में अधूरा स्टाफ‑डेंसिटी बनी रहेगी, जिससे छात्रों के सीखने के माहौल पर नकारात्मक परिणाम संभव है।

Published: May 6, 2026