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Category: शहर

मद्रास में इंटरएक्टिव पुरातत्व कार्यशालाओं से शैक्षणिक परिदृश्य में नई लहर, पर नगर प्रशासन की भूमिका में अंतराल

मद्रास विश्वविद्यालय के प्रायोगिक पुरातत्व विशेषज्ञ अनबजगन के. ने बच्चों और वयस्कों के लिए कार्यशालाओं की एक श्रृंखला शुरू की है, जिसका उद्देश्य पुरातत्व विज्ञान को सैद्धांतिक व्याख्यानों के बजाय हाथ‑से‑कर के अनुभव में बदलना है। छात्र मिट्टी के लेयर, दरबार के अवशेष और प्राचीन उपकरणों की प्रतिकृतियों को खुद बनाते‑बनाते इतिहास की बुनियाद समझते हैं। इस पहल को स्थानीय विद्यालयों और सामुदायिक केंद्रों में आयोजित किया गया, जहाँ शिक्षक‑शिक्षार्थी दोनों को ‘रूट लर्निंग’ की बजाय खोज‑परक सीखने की सुविधा मिली।

हालाँकि शैक्षणिक पहल की सराहना की जा रही है, मगर इस पहल की सफलता का मापनगर प्रशासन की सहभागिता से जुड़ा है। कार्यशालाओं के लिए उपयोग किए गए कई विद्यालय हॉल और सार्वजनिक पुस्तकालयों को केवल अस्थायी अनुमतियों के आधार पर उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा, शहर के कुछ वार्डों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं—जैसे सतत बिजली सप्लाई और जल‑सुविधा—की कमी ने प्रतिभागियों के अनुभव को अस्थिर किया। कई स्थानों पर बुनियादी सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करने के कारण कार्यशालाओं को स्थानांतरित या रद्द करना पड़ा, जिससे इच्छुक छात्रों के समूह सीमित हो गए।

शहर की शिक्षा‑प्रशासनिक नीति के तहत, ऐसे नवाचारों को नगर निगम के साथ समन्वयित कर व्यवस्थित रूप से स्केलेबल बनाना चाहिए। हालांकि, बजट कटौती और बुनियादी ढांचे के पुराने होने की वजह से, नगरपालिका ने न तो कार्यशालाओं के लिए स्थायी स्थल प्रदान किया है न ही प्रतिभागी-सहायक साधन—जैसे ध्वनि‑प्रोसेसिंग उपकरण या डिजिटल प्रोजेक्टर—की व्यवस्था की है। परिणामस्वरूप, कार्यशालाओं का प्रभाव शहर के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों तक सीमित रह गया, जबकि उपनगरों व आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को पर्याप्त लाभ नहीं मिला।

शिक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि यदि नगर प्रशासन इस तरह के शैक्षणिक प्रयोगों को दीर्घकालिक समर्थन देता, तो न केवल पुरातत्व जागरूकता बल्कि विज्ञान‑आधारित सोच का प्रसार संभव हो सकता है। मौजूदा स्थिति में, अनबजगन के. की पहल को प्रशंसा के साथ-साथ नगर प्रशासन की योजना‑बद्धता में अंतराल की ओर इंगित करने वाली एक व्यवस्थित चेतावनी के रूप में देखना उचित है।

Published: May 3, 2026