जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: शहर

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

मुंबई में लगातार बिजली कटौती से नागरिकों के धैर्य पर दबाव

गर्मियों की सुदीप्त धूप के बीच मुंबई शहर को बार‑बार बिजली की अस्थायी मंदी ने जकड़ लिया है। बुनियादी वितरण नेटवर्क की क्षमताओं पर दबाव, तकनीकी खराबी और अनुपयुक्त नियोजन के कारण, कई उपनगरों में 12 घंटे तक निरंतर ब्लैकआउट देखे जा रहे हैं।

बिजली विभाग ने समस्या के मूल को ‘तकनीकी त्रुटियों’ और ‘वितरण नेटवर्क के अति‑भार’ के रूप में बताया है, परंतु वास्तविकता यह है कि जल्द‑बाज़ी से लिये गये फैसले, रख‑रखाव की उपेक्षा और प्री‑एडवांस सूचना की कमी ने जनता के भरोसे को हिला दिया है। ग्रीष्मकाल में बिजली का अचानक बंद होना न केवल घर‑घर में ठंडक की लहर को रोकता है, बल्कि अस्पतालों, स्कूलों और छोटे व्यापारियों के संचालन को भी बाधित करता है।

संकट के दौरान सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं में स्पष्ट असंतोष झलक रहा है। सोशल‑मीडिया पर तेज़ी से फैले आँकड़ों के अनुसार, कई नागरिकों ने आपातकालीन जनरेटर चलाने के लिये अतिरिक्त खर्च किया, जबकि जलवायु–अनुकूलता के लिये सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘हरित ऊर्जा’ उपायों का लाभ उठाने की राह भी कठिन प्रतीत हो रही है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया में, बी.ई.एस.टी. (बोर्डिंग एण्ड एक्सपोर्ट सर्विसेज ट्रस्ट) ने मॉनसून की तैयारी को सुदृढ़ करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, यह वादा केवल मौसमी भारी बारिश के साथ उत्पन्न जल‑संकट को संभालने तक सीमित लगता है, न कि मौजूदा विद्युत आपूर्ति के मूलभूत सुधारों तक। इस पर वर्णित ‘संकट‑प्रबंधन योजना’ में स्पष्ट समय‑सीमा या ठोस कार्य‑सूची नहीं दिखती, जिससे जनता की नज़र में यह आयरनिक संकेत बन जाता है।

शहर प्रशासन के लिए यह एक मौक़ा है कि वह न सिर्फ तात्कालिक बीमर‑ऑफ‑सिस्टम को सुलझाए, बल्कि भविष्य के लिए एक स्तरीय, विकेन्द्रीकृत और लचीलापन‑सम्पन्न ऊर्जा ढांचा तैयार करे। तभी मुंबई के नागरिक अपने दैनंदिन जीवन में शीतलता की उम्मीद कर सकेंगे, न कि अस्थायी ‘प्रकाश‑की‑उपलब्धता’ पर भरोसा करना पड़ेगा।

Published: May 9, 2026