मोदी-शाह की कड़ी मेहनत ने ‘बाहरी’ टैग मिटा दिया
राजस्थान के अजमेर में हाल ही में नगरपालिका विभाग ने एक बड़े विकास कार्यक्रम को त्वरित गति दी, जिससे शहर को ‘बाहरी’ या ‘परदेशी’ के रवैये से सुटकारा मिला। इस बदलाव के पीछे दो प्रमुख नेता – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह – की रणनीतिक भागीदारी को नहीं नकारा जा सकता।
पिछले वर्ष शहर के कुछ हिस्सों में सड़क‑पाइलट, जल आपूर्ति और कचरा प्रबंधन के मामलों में बिखराव और देरी की आलोचना की जा रही थी। नागरिकों ने ‘बाहरी दलालों’ द्वारा चलाए जा रहे प्रोजेक्ट्स को लेकर असंतोष व्यक्त किया, जिससे प्रशासन पर भरोसा घटता दिखा। इस माहौल में राज्य सरकार ने केन्द्र के साथ मिलकर एक संयुक्त कार्यकाल शुरू किया।
मुख्य कदमों में शामिल थे:
- स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 45 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण एवं मौजूदा सड़कों का पुनर्वास, जिससे दैनिक औसत यात्रा समय में 20 प्रतिशत कमी आई।
- अधिग्रहण‑वित्तीय मॉडलों के माध्यम से 18 लाख लीटर रोज़ाना अतिरिक्त जल आपूर्ति, जिससे जल संकट के मुद्दे पर तत्काल राहत मिली।
- नए कचरा संग्रहण बिंदु स्थापित कर 30 प्रतिशत कचरा पुनर्चक्रण दर बढ़ाना, जो पहले 10 प्रतिशत से अधिक नहीं था।
- स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर ‘ऑडिटेड टर्न‑ओवर’ कार्य योजना लागू कर सुरक्षा में सुधार, खासकर रात के समय सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट के उपयोग में वृद्धि हुई।
इन पहलों से नागरिकों को नजदीकी सुधार का स्पष्ट अनुभव प्राप्त हुआ। बाजारों में ट्रैफिक जाम की शिकायतें घट गईं, घर‑घर जल कटौती की समस्या अब पहले जैसी नहीं रही, और कचरा प्रबंधन में साफ‑सफ़ाई में उल्लेखनीय सुधार हुआ। कई स्थानीय व्यवसायियों ने कहा कि ‘अब शहर में बाहरी हाथों की ताकत नहीं, बल्कि हमारी अपनी शक्ति काम कर रही है।’
हालांकि परिणाम सराहनीय हैं, लेकिन एक सूखी आलोचना भी जरूरी है। कई परियोजनाओं में मंजूरी की प्रक्रिया में शुरुआती देरी और निजी ठेकेदारों के चयन में पारदर्शिता की कमी को लेकर सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निरंतर निगरानी और स्थानीय निकायों की स्वतंत्रता के बिना यह सुधार स्थायी नहीं ठहर सकता।
भविष्य की दिशा तय करने के लिए नगर निगम को चाहिए कि वह अपनी कार्यप्रणाली को अधिक खुले और जवाबदेह बनाए, जबकि केंद्र और राज्य के सहयोग को संतुलित रूप से आगे बढ़ाए। तभी ‘बाहरी’ टैग का पूर्ण निरूपण संभव होगा, न कि केवल धुंधले शब्दों में।
Published: May 5, 2026