मेट्रो प्राधिकरण ने लाएगा अधिक हरे संकेत: ट्रैफ़िक प्रवाह में होगा सुधार, लेकिन समस्या बनी रहेगी
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने इस सप्ताह अपने संचालन अधिकारिकों के बीच एक व्यापक सर्वेक्षण के बाद शहर के प्रमुख राजमार्गों पर हरे संकेतों की संख्या बढ़ाने की योजना प्रस्तावित की। यह कदम, मेट्रो ट्रांज़िट के साथ-से-वाहन सिद्धांत को सुदृढ़ करने और पीक घंटे में भी यात्रियों को समय पर गंतव्य तक पहुँचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
परियोजना के मुख्य अधिकारी, प्रबंध निदेशक (ऑपरेशन) अनिल सरवोत्री ने बताया कि वर्तमान में मेट्रो के निकटवर्ती सिग्नल चक्रों में वाहनों का इंतज़ार औसत 45 सेकंड तक पहुँच जाता है, जिससे सड़कों पर भीड़भाड़ और धुआँ प्रदूषण दोनों में वृद्धि होती है। नई रणनीति के तहत, प्रमुख मेट्रो स्टेशनों की ओर जाने वाले मुख्य सड़कों पर हरे संकेतों का औसत समय 30% तक घटाने का लक्ष्य रखा गया है।
परिवर्तन के लिए आवश्यक तकनीकी उपकरणों की आपूर्ति, सिग्नल टिंटर को रीयल‑टाईम डेटा के साथ एकीकृत करना और नगर निगम के ट्रैफ़िक प्रबंधन विभाग के साथ समन्वय करना आवश्यक होगा। प्रशासनिक तौर पर, इस कार्य को अंमल में लाने के लिये 12 महीनों की समयसीमा निर्धारित की गई है, लेकिन पहले चरण में चुनिंदा 15 हाई‑डेनसिटी क्षेत्रों पर पायलट परीक्षण किया जाएगा।
नागरिकों की ओर से मिली प्रतिक्रिया मिली-झुली है। एक नियमित commuter, रीना शर्मा, ने कहा, “अगर वास्तव में हरे संकेत बढ़ेंगे तो हमें रोज़ की जाम से थोड़ा राहत मिल सकती है, पर जब तक सड़क की बुनियादी मरम्मत नहीं होगी, तब तक यह उपाय केवल अस्थायी राहत देगा।” दूसरी ओर, छोटे व्यापारियों ने चिंता जताई कि हरे संकेतों का अनुकूलन ट्रैफ़िक के प्रवाह को बिगाड़कर उनके ग्राहक पहुँच में बाधा पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संकेतों में बदलाव अकेले ही शहर के जटिल ट्रैफ़िक जाल को सुदृढ़ नहीं कर पाएंगे। परिवहन विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा, “हरे संकेतों की संख्या बढ़ाना आवश्यक उपाय है, पर इसके साथ‑साथ सड़कों की चौड़ाई, सार्वजनिक बस परवाह, और साइकिल लेन जैसे समग्र उपायों की भी आवश्यकता है। अन्यथा, यह केवल एक शॉर्ट‑टर्म ‘ट्रैफ़िक क्रीम’ बनकर रह जाएगा।”
आगे के कार्यान्वयन में, DMRC ने नगर निगम के साथ मासिक प्रगति रिपोर्ट साझा करने और नागरिक प्रतिनिधियों को सार्वजनिक सुनवाई के लिए आमंत्रित करने का वचन दिया है। जबकि यह पहल बुनियादी ढाँचे में सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम दर्शाती है, यह स्पष्ट है कि शहरी ट्रैफ़िक के जटिल मुद्दों को हल करने के लिए बहु‑स्तरीय और निरंतर प्रयासों की जरूरत होगी।
Published: May 5, 2026