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मेजर जनरल गौतम की एनसीसी कैडेट्स के साथ बातचीत: प्रशिक्षण परिस्थितियों में चिंताएँ और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
लखनऊ – भारतीय रिज़र्व्ड फ़ोर्सेज़ के मेजर जनरल (रिटायर्ड) गौतम ने इस मंगलवार को लखनऊ स्थित राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एनपीए) में आयोजित एनसीसी प्रशिक्षण शिविर के कैडेट्स के साथ संवाद सत्र किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को सैन्य क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी से सीधे विचार‑विनिमय का अवसर प्रदान करना और उनके साक्ष्य‑आधारित प्रशिक्षण की स्थिति पर प्रकाश डालना था।
सत्र की शुरुआत मेजर जनरल गौतम ने एनसीसी के राष्ट्रीय उद्देश्यों, राष्ट्रीय एकता व तत्परता को स्थायित्व प्रदान करने में उसकी भूमिका, तथा इस प्रणाली के द्वारा युवा वर्ग की नेतृत्व क्षमताओं को सजग करने पर प्रकाश डालते हुए की। इसके बाद उन्होंने कैडेट्स के सवालों को स्वागत किया, जिनमें प्रमुखतः प्रशिक्षण सुविधाओं, शारीरिक तैयारी के लिए उपलब्ध इन्फ्रास्ट्रक्चर, और बजट में कटौती से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख किया गया।
कैडेट्स ने बताया कि कई प्रशिक्षण मैदानों में पर्याप्त खेल उपकरण, आधुनिक गोलीबारी रेंज और मेडिकल सुविधा की कमी है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ क्षेत्रीय संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत लंबित है, जिससे नियमित अभ्यास में बाधा उत्पन्न हो रही है। इन सूचनाओं पर मेजर जनरल गौतम ने उत्तर दिया कि शहरी विकास की प्राथमिकता अक्सर पर्यावरणीय प्रयोगशालाओं और शहरी नियोजन के बीच संतुलन बनाने में विफल रहती है। उन्होंने उल्लेख किया कि क्षतिपूर्ति के रूप में कुछ वैकल्पिक स्थानों की पहचान की जा रही है, परन्तु प्रक्रिया धीमी है।
सत्र के दौरान स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधियों ने भी उपस्थित होकर बताया कि पिछले आर्थिक वर्ष में एनसीसी की वित्तीय आवंटन में 12% की कटौती हुई थी, जो अप्रत्याशित रूप से कई बेसिक उपकरणों की खरीद को रोक दी। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि इस वर्ष के बजट में पुनर्स्थापन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, पर शासकीय मंजूरी की प्रक्रिया में आपसी समझौता अभी भी लंबित है।
मेजर जनरल गौतम ने यह भी संकेत किया कि भविष्य में सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (पीएनपी) के माध्यम से प्रशिक्षण सुविधाओं को अद्यतन करने की संभावना है। उन्होंने कहा, "जब तक सरकारी धन का प्रवाह सुचारु नहीं होता, तब तक हमारे युवाओं को जलती हुई मोमबत्ती की तरह काम करना पड़ता है।" यह हल्का‑फुल्का व्यंग्य प्रशासनिक बाधाओं को भी उजागर करता है, जबकि साक्षरता और नियोजन की आवश्यकता पर बल देता है।
सत्र के अंत में कैडेट्स ने एक संक्षिप्त प्रस्ताव लिखी, जिसमें बेहतर उपकरण, नियमित रख‑रखाव, और प्रशिक्षकों के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की माँग की गई। प्रस्ताव को स्थानीय नगर परिषद एवं जिला खेल विकास बोर्ड को सौंपा गया, जिससे आगे की औपचारिक कार्रवाई की उम्मीद है।
इस प्रकार, मेजर जनरल गौतम की बातचीत ने एनसीसी कैडेट्स की वास्तविक चुनौतियों को उजागर किया और प्रशासनिक प्रतिक्रिया की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया, परन्तु बुनियादी बुनियादी ढाँचा सुधार की आवश्यकताएँ अभी भी प्राथमिकता बनी हुई हैं।
Published: May 7, 2026