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Category: शहर

मुख्यमंत्री ने पीएमआरडीए को दोहरी सुरंग के लिए संरचनात्मक योजना छह महीने में तैयार करने और एसपीवी स्थापित करने का निर्देश दिया

राज्य के मुख्य मंत्री ने आज सुबह नगर नियोजन और विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) को निर्देशित किया कि दोहरि‍आ अंत:स्थलार्पण (ट्विन टनल) परियोजना की संरचनात्मक योजना अगले छह महीने में तैयार की जाए। इस दिशा-निर्देश के साथ ही उन्होंने एक विशेष परियोजना वाहन (SPV) की स्थापना काभी आदेश दिया, ताकि वित्तीय और कार्यान्वयन संबंधी जटिलताओं से निपटा जा सके।

पीएमआरडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने इस आदेश को 'उच्च प्राथमिकता' बताया और कहा कि टीम पहले से ही संभावित ठेकेदारों, डिजाइन फर्मों और वित्तीय संस्थानों के साथ संवाद स्थापित कर रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस परियोजना का उद्देश्य शहरी ट्रैफिक बोझ को कम करना और प्रचलित राजमार्गों की भीड़ को सड़कों की दोहरी क्षमता से संतुलित करना है।

हालांकि, नागरिक संघों ने इस कदम को दोहराते हुए कहा कि इस तरह के बड़े‑पैमाने के अधुस्तरीय योजना में अक्सर देरी और लागत बढ़ोतरी की प्रवृत्ति रहती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले कुछ वर्षों में कई इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में नियोजन की कमी, अनुबंधों में अस्पष्टता और वित्तीय वैधता की जांच में चूक के कारण शून्य परिणाम सामने आए हैं।

नियोजन प्राधिकरण की आलोचना करते हुए, पर्यवेक्षक ने बताया कि दोहरी सुरंग जैसी जटिल परियोजनाओं के लिए स्पष्ट रूप से रखरखाव, सुरक्षा उपाय और आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना का विस्तृत मसौदा आवश्यक है। बिना इन उपायों के, परियोजना न केवल देरी का कारण बनेगी बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी जोखिम उत्पन्न कर सकती है।

प्रमुख मंत्री ने कहा कि छः महीने की समय सीमा एक 'संकल्पनात्मक' लक्ष्य है, लेकिन अंततः इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि समिति संभावित बाधाओं को कितनी शीघ्रता से पहचान कर समाधान कर पाती है। यदि योजना समय सीमा में पूरी नहीं हुई, तो आगे की कार्यवाही और जिम्मेदारियों का पुन: मूल्यांकन किया जाएगा।

इस बीच, शहर के यातायात अधिकारी आशा जताते हैं कि यदि योजना निर्धारित अनुसार प्रगति करती है, तो अगले दो वर्षों में दोहरी सुरंग के निर्माण से बाजारों, आवासीय क्षेत्रों और औद्योगिक जिलों के बीच का आवागमन काफी हद तक सुगम हो जाएगा। फिर भी, अभ्यर्थी नागरिकों को इस बात की याद दिलाना आवश्यक है कि ‘भौतिक ढांचा’ जितना मजबूत हो, प्रशासनिक ढांचा उतना ही कुशल होना चाहिए, वरना यह ‘सुरंग’ केवल कागज पर ही रह सकती है।

Published: May 6, 2026