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Category: शहर

मुख्यमंत्री ने दक्षिण गुजरात में 8 स्मार्ट GIDC एस्टेट्स की घोषणा की

गुजरात के मुख्यमंत्री ने 2 मई को द्वारका, बड़ोदा, सूरत और पोरबंदर सहित पाँच जिलों में आठ नई स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र (GIDC) स्थापित करने की योजना घोषित की। प्रत्येक एस्टेट को 200 वर्ग किलोमीटर से अधिक फैला हुआ बताया गया है, जहाँ प्लाज़ा‑स्तर की बुनियादी सुविधाओं, पर्यावरण‑अनुकूल ऊर्जा प्रणाली और डिजीटल कस्टम हब की व्यवस्था होगी।

परियोजना के तहत कुल निवेश लगभग 12,500 करोड़ रुपये का अनुमान है और 1,20,000 सीधा रोजगार सृजन करने की अपेक्षा है। राज्य सरकार ने बताया कि स्मार्ट एस्टेट्स में पूर्वनिर्मित गोदाम, स्वचालित लॉजिस्टिक्स, और एआई‑संचालित उत्पादन लाइनों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे छोटे तथा मध्यम उद्यमियों को बड़े उद्योगों के साथ सहयोग करने का मंच मिले।

वहीं, स्थानीय प्रशासन की ओर से भूमि अधिग्रहण और जल-सिंचन के लिये स्पष्ट समय‑सीमा जारी की गई है, परन्तु कई ग्रामसभा ने अधिग्रहित क्षेत्रों में फसल‑उत्पादन पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई। अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और पुनर्वास पैकेज में असंतोष, पिछली परियोजनाओं के अनुभव को दोहराने का जोखिम पैदा करता दिख रहा है।

बुनियादी ढाँचे की बात करें तो, स्मार्ट एस्टेट्स के लिये 1,500 किमी लंबी फाइबर‑ऑप्टिक नेटवर्क, 250 मीटर की हाइब्रिड सौर‑पवन ऊर्जा साइट और हाईवे‑सर्विस्ड कनेक्शन की व्यवस्था की गई है। फिर भी, कुछ तकनीकी विश्लेषकों ने “स्मार्ट” शब्द के प्रयोग पर नज़र रखी है, क्योंकि वर्तमान में कई सरकारी योजनाओं में घोषणा‑पर‑पहलू ही अधिक रहता है, जबकि जमीन‑स्तर के कार्यों में देरी का इतिहास बना रहता है।

समाज के विभिन्न वर्गों ने इस घोषणा को आर्थिक विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानते हुए सराहा, पर साथ ही स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की कि विकास‑निर्माण के साथ‑साथ आवास, स्वास्थ्य और शैक्षिक सुविधाओं का भी संतुलित नियोजन किया जाए। अगर योजना‑समय पर आगे बढ़ती है तो दक्षिण गुजरात को भविष्य में औद्योगिक मानचित्र पर एक नई चमक मिल सकती है, बशर्ते घोषणा‑पर‑कार्यान्वयन की खाई को पाटने में प्रॉम्प्ट एवं पारदर्शी कदम उठाए जाएँ।

Published: May 4, 2026