मुख्य मंत्री ने सार्वजनिक शिकायतों के शीघ्र निवारण का आश्वासन दिया
बेंगलुरु शहर में पिछले दो महीनों से बढ़ती नागरिक असंतुष्टि को देखते हुए, मुख्यमंत्री श्री राजेश कुमार ने कल दोपहर संघटनात्मक बैठक में सार्वजनिक शिकायतों के त्वरित समाधान की प्रतिबद्धता जताई। बैठक में नगर विकास अधिकारी, सिविल सैंट्री अधिकारी और स्थानीय वार्ड कॉर्स के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था।
मुख्य मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष शहर में दर्ज 12,763 शिकायतों में से 68% अभी तक निपट नहीं पाए हैं, जिसके कारण रोज़मर्रा की जिंदगी में असुविधा बढ़ रही है। उन्होंने नई ‘फास्ट-ट्रैक शिकायत समाधान समिति’ (FTSC) का गठन कर, प्रत्येक शिकायत को 15 दिनों के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा है। समिति में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी, दो नगर निगम के सदस्य तथा एक नागरिक प्रतिनिधि शामिल होंगे।
नियुक्त समिति को तत्काल कार्रवाई के लिये डिजिटल पोर्टल की भी व्यवस्था करने का निर्देश मिला है, जहाँ नागरिक अपने मुद्दे अपलोड कर सकते हैं और प्रगति को वास्तविक‑समय में ट्रैक कर सकते हैं। पोर्टल में AI‑आधारित वर्गीकरण और प्राथमिकता निर्धारण प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे जटिल मामलों को ऊपर उठाने में देरी नहीं होगी।
नागरिक प्रतिनिधि, शरणा मेहता, ने कहा कि "विलंब की समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के अभाव से उत्पन्न हुई है। अगर नई प्रणाली वास्तव में कार्यान्वित होगी, तो हमें काग़ज़ी काम में नहीं फँसना पड़ेगा"।
नगर निगम के टाउन प्लानर, वर्षा सिंह, ने बताया कि कई मामलों में मूल कारण बुनियादी ढाँचे की कमी है—जैसे पुरानी जल पाइपलाइन, क्षतिग्रस्त सड़कों और असमान बौछार‑नालियों की अनुपलब्धता। उन्होंने कहा कि शिकायत समाधान के साथ-साथ दीर्घकालिक मूलभूत सुधार भी जरूरी है, नहीं तो त्वरित निपटारा सिर्फ अस्थायी राहत देगा।
मुख्य मंत्री ने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा में समाधान नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी को जिम्मेदारी से हटाया जाएगा। यह कड़ी चेतावनी प्रशासनिक हाथों के लिए एक स्पष्ट संकेत है, पर यह सवाल छोड़ती है कि क्या कर्मियों का बहु‑स्तरीय प्रशिक्षण और यथोचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्थानीय व्यवसायी संघ के अध्यक्ष, अजय वर्मा ने कहा, "विलंबित शिकायतें न केवल आम जनता को बल्कि व्यापारिक माहौल को भी बाधित करती हैं। हमें आशा है कि यह नया मंच वास्तविक सुधार लाएगा, न कि सिर्फ शब्दों का खेल"।
शहर में आज तक के सर्वेक्षण में 57% निवासी मानते हैं कि शिकायत प्रणाली के ऊपर विश्वास कम हो रहा है। सरकारी अधिकारी इस आंकड़े को देखते हुए, आगामी दो हफ्तों में पोर्टल का बेटा‑टेस्ट जनता के साथ आरम्भ करने की योजना बना रहे हैं।
इस कदम के बावजूद, आलोचक यह चेतावनी दे रहे हैं कि यदि मौजूदा प्रशासनिक लापरवाही को दूर न किया गया तो यह वादा सिर्फ एक और राजनीतिक बयान बन कर रह जाएगा। समय ही बताएगा कि 'शीघ्र निवारण' शब्द किस हद तक वास्तविकता में बदलेगा।
Published: May 6, 2026