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Category: शहर

भुवनेश्वर में बरसात के लिये नई SOP जारी, शहरी निकायों पर जल निकासी साफ़ करने का दायित्व

राज्य सरकार ने भुवनेश्वर के शहरी स्थानीय निकायों के लिए एक नया मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी किया है, जो इस वर्ष के मोनसून के लिए उनके तैयारियों को औपचारिक बनाता है। इस निर्देश में जल निकासी प्रणाली को साफ़‑सुथरा रखने, विशेषकर नीचे गिरते क्षेत्रों में जलभराव को रोकने के लिये तत्काल उपाय करने की स्पष्ट आवश्यकता बताई गई है।

वित्तीय वर्ष‑2025‑26 में कई बार विरोधियों ने कहा था कि “पानी का रास्ता बनता ही नहीं”, पर अब अधिकारियों को इस बात का उत्तरदायित्व दिया गया है कि वे अपने‑अपने क्षेत्रों में गटर‑नाली की स्थिति का अभिलेख रखें और किसी भी रुकावट को 24 घंटे के भीतर हटाएँ। इसमें छोटे‑छोटे गड्ढे और अंधेरे नालियों को भी प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे पिछले वर्ष की तरह “सड़क के ऊपर जलधारा” के दृश्य दोहराने की संभावना कम रहे।

सुविधाजनक क्षेत्रों में विशेष रूप से कम उभरे इलाकों को राहत‑केन्द्र स्थापित करने का निर्देश मिला है। इन केन्द्रों में आवश्यक जल‑स्रोत, प्राथमिक चिकित्सा उपकरण और खाने‑पीने की व्यवस्था होगी, जिससे प्रभावित लोगों को तुरंत सहारा मिल सके। इसके अतिरिक्त, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को तैयारियों के मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अनिवार्यता भी लागू की गई है, जिससे उत्तरदायित्व की कसौटी स्पष्ट रहे।

नागरिकों को इस SOP के सफल कार्यान्वयन में सहयोग करने का आग्रह किया गया है। प्रशासन ने निवासियों से अनुरोध किया है कि वे अपनी ओर से भी नालियों को साफ़ रखें और किसी भी जल‑प्रतिबंध की सूचना तुरंत नजदीकी नगर कार्यालय को दें। व्यवहारिक रूप से, यह वही पुरानी राह है जहाँ “सुरक्षित बरसात” का नारा अक्सर हवा में रह जाता है, पर अब इसे लिखित आदेश में बदल दिया गया है।

इस कदम का मूल उद्देश्य पिछले कई वर्षों में बार‑बार देखी गई जल‑भराव की समस्याओं को प्रशासनिक लापरवाही के बजाए ठोस योजना‑संकल्प में बदलना है। चाहे जनता इस नई दिशा को स्वीकार करे या नहीं, लेकिन अब शहरी निकायों की परतों में “जिम्मेदारी” शब्द का एक नया अर्थ जुड़ गया है।

Published: May 5, 2026