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भुवनेश्वर में पीक आवर्स में भारी वाहन पर कड़ी कार्रवाई, ट्रैफ़िक जाम को कहें अलविदा

भुवनेश्वर महानगर पालिका ने 8‑10 बजे तथा 17‑19 बजे के पीक घंटों में भारी वाहन (ट्रक, डंपर, बड़े बड़ो के) के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम शहर में लगातार बढ़ती ट्रैफ़िक जाम को समाप्त करने एवं प्राथमिक सड़क उपयोगकर्ताओं को सुगम आवागमन प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

नगर निगम के लाइट‑ट्रैफ़िक बोर्ड (एलटीबी) ने कहा कि अब सभी भारी वाहन, जिनका कुल वजन 3.5 टन से अधिक है, निर्धारित पीक अवधि में घरों के आसपास के मुख्य राजमार्गों पर प्रवेश नहीं कर पाएंगे। उल्लंघन करने पर ₹5,000 तक का जुर्माना और वाहन का तत्काल रुकना तय किया गया है। उल्लंघन की पहचान के लिए मुख्य जंक्शन पर नई सीसीटीवी कैमरा प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे रियल‑टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी।

भारी वाहनों के नियंत्रण के लिए नगर विकास विभाग ने दो वैकल्पिक रूट तैयार किए हैं। इन मार्गों को विशेष संकेतों से चिह्नित किया जाएगा तथा शर्तों में हल्के ट्रैफ़िक फ़्लो के साथ मिलान किया गया है। हालांकि, कई स्थानीय व्यापारियों ने इस कदम को “व्यावसायिक दबाव” के रूप में आलोचना की, क्योंकि उन्हें समय‑सापेक्ष डिलिवरी में देरी का सामना करना पड़ सकता है। व्यापारिक संघों ने कहा कि यदि उचित लॉजिस्टिक समर्थन न दिया गया तो छोटे‑उद्यमियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।

शहर की ट्रैफ़िक पुलिस ने उल्लेख किया कि भारी वाहन अक्सर दो‑तीन लेनें घेर लेते हैं, जिससे सिविल वाहनों की गति घट जाती है और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ता है। “उच्चतम जाम के समय में ट्रक को प्रमुख सड़कों पर चलाने की अनुमति देना एक आँसू के साथ व्यावसायिक लापरवाही है,” कमांडर ने कहा, अपने बयान में हल्के विडंबनापूर्ण स्वर के साथ।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिबंध केवल पीक समय तक सीमित रहेगा और नियमित रूप से समीक्षा की जाएगी। यदि डेटा दिखाता है कि प्रवाह सुधर रहा है, तो नियम में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, यदि वाहन मालिकों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने में कठिनाई होती है, तो विशेष समय‑स्लॉट प्रदान किए जा सकते हैं।

शहरवासियों ने इस कदम को दो धारीय तलवार के रूप में देखा है। कुछ ने कहा कि “अब सुबह की भीड़ में टॉपरी नहीं, बल्कि हँसी ही हँसी” होगी, जबकि अन्य ने बताया कि “यदि वैकल्पिक मार्ग भी भीड़भाड़ में बदलें तो यह कदम बेकार है।” लेकिन यह स्पष्ट है कि नगर निगम अब “भारी ट्रक को भीइले” कहि देने की बजाय, उन्हें “वहां-पर‐ऐडजस्ट” करने की कोशिश में है।

भविष्य में भारी वाहन प्रतिबंध की प्रभावशीलता को आंकने हेतु नगर निगम ने एक स्वतंत्र ऑडिट टीम को नियुक्त किया है, जो सप्ताहिक रिपोर्ट नगर परिषद को प्रस्तुत करेगी। इस प्रक्रिया में डेटा‑चालित निर्णय लेने के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग किया जाएगा, जिससे नीति‑निर्माण में पारदर्शिता बनी रहेगी।

Published: May 4, 2026