भिवापूर में ज्वलनशील अवशेष जलाने पर किसान को हिरासत में
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के भिवापूर गाँव में पिछले दो दिनों में जलाए गए फसल अवशेषों से तेज़ी से फैलती आग ने निवासियों को असहज कर दिया। स्थानीय पुलिस ने आरोपी किसान, नवराज बायकर (४०), को अवैध रजनीगी ज्वालाक्रीड़ा के आरोप में गिरफ्तार किया।
फसल कटाई के बाद बायकर ने अपने खेत में बचे हुए धान के डंठल जलाए, जिसका धुआँ तुरंत पास के ग्रामीण क्षेत्रों में फयाली हुई। तेज़ हवा ने धुएँ को गांव के मुख्य मार्ग तक पहुंचा दिया, जिससे इमारतों की छतें और प्लास्टर जलने लगे। अग्निशमन दल को दो घंटे बाद संलग्न होना पड़ा, परंतु पहले ही कई घरों को नुकसान हुआ और कुछ परिवार को अस्थायी रूप से पनाह लेने के लिये निकाला गया।
गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने बायकर को कृषि अवशेष ज्वलन रोकथाम अधिनियम, 2020 के तहत दुर्व्यवहार के आरोप में परिवादी रजिस्टर में दर्ज किया। स्थानीय प्रशासन ने तत्काल राहत उपाय के तौर पर प्रभावित परिवारों को अस्थायी आवास, भोजन व चिकित्सीय सहायता प्रदान करने का वादा किया, परंतु क्रमशः वितरण में देरी को लेकर लोगों में निराशा दिखाई दे रही है।
बायकर के आरोपित कृत्य पर नगरपालिका अधिकारी ने कहा, “कृषि residue को जलाना न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि ऐसी अनपेक्षित आपदाएँ भी उत्पन्न करता है। हमें कड़ी सजा के साथ साथ वैकल्पिक तकनीकों, जैसे बायोगैस या हरित खाद, को प्रोत्साहित करना चाहिए।” यह बयान आजकल की तेज़‑रफ़्तार प्रशासनिक “अपडेट” का एक उदाहरण माना जा सकता है: सविधान के कागज़ पर नीति बड़ी, जमीन पर कार्य छोटे।
स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा कर कहा कि “आग का धुआँ सुबह के वायुमंडल को भी प्रदूषित कर चुका है, और दवाओं की कीमतें बढ़ी हैं।” जबकि शहरी समाचार चैनलों ने इस घटना को “कृषि‑पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी” के रूप में पेश किया, गाँव के अनुकूल समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम अभी बाकी है।
इस घटना ने महाराष्ट्र सरकार को सतर्क किया है, और अगले महीने राज्य के विभिन्न जिलों में “कृषि अवशेष प्रबंधन कार्यशालाएँ” आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है। लेकिन यह देखना बाकी है कि यह प्रस्ताव केवल कागज पर ही रहे, या असली जमीन पर भी असर देखे।
Published: May 4, 2026