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Category: शहर

भोपाल में दलित महिला मजदूरों ने शोषण व रिश्वत के खिलाफ आवाज़ उठाई

भोपाल के कई नगरपालिका विभागों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में नियोजित दलित महिला श्रमिकों ने पिछले दो हफ्तों से निरंतर प्रतिरोध किया है। वे वेतन में अनदेखी कटौतियों, असंगत कार्य घंटों और मध्यस्थों से ली जाने वाली रिश्वत की अत्यधिक माँगों को लेकर अपना अपमान सहन नहीं कर रहे हैं।

सपोर्ट समूहों के अनुसार, कई महिला कामगारों को रोज़गार के अनुबंध में ‘ब्यूरोक्रेटिक टैक्स’ के रूप में अतिरिक्त पैसों की माँग की जाती है, जिससे उनका वास्तविक वेतन आधे से भी कम हो जाता है। इन मांगों को पूरा न करने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है या दैनिक काम के प्रकार बदल दिए जाते हैं। एक गुप्त स्वर में, एक पदस्थ महिला ने कहा, “अगर हमने टालने नहीं दिया तो हमें सीधे पाइप लाइन में धकेल दिया जाता है—और वह भी बिना किसी पेरोल के।”

प्रशासन ने इस बढ़ते असंतोष पर नोटिस लेकर, नगर निगम के आयुक्त ने एक जाँच समिति की स्थापना का ऐलान किया। समिति में दो सामाजिक कार्यकर्ता, एक महिला शोषण विरोधी संगठन का प्रमुख और दो नगर अधिकारी शामिल हैं। आयुक्त ने कहा, “हम इस समस्या की गंभीरता को समझते हैं और शीघ्र ही वैध वेतन वितरण तथा मध्यस्थों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।”

आलोचनात्मक टिप्पणीकारों ने तर्क दिया कि ऐसे प्रतिबद्धताएँ अक्सर ‘समय के साथ धुल’ जैसी बन जाती हैं—जैसे भ्रष्टाचार अब भी टोल‑फ्री रूटीन बन चुका है। इस बीच, अधिकारियों ने कहा कि एकत्रित सबूतों के आधार पर दो मध्यस्थों को प्रतिबंधित किया गया है और उन्हें आगे की कार्यवाही के लिए हिरासत में रखा गया है।

प्रदर्शन का प्रत्यक्ष प्रभाव स्थानीय सेवाओं के संचालन में दिखा, जहाँ साफ‑सुथरे पानी की आपूर्ति और रोज़गार संकलन में हल्की गिरावट आई। हालांकि, दलित महिलाओं के समूह ने प्रयोगात्मक स्वर में कहा, “हमारी माँगें केवल दांवपेच नहीं, बल्कि बुनियादी सम्मान की मूलभूत जरूरतें हैं।”

अगले सप्ताह में नगर निगम एक सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने का प्रस्ताव रख रहा है, जहाँ प्रभावित श्रमिकों को अपनी शिकायतें सीधे अधिकारियों तक पहुँचाने का अवसर मिलेगा। प्रशासन की क्षमता पर अब सवाल रहेगा कि वह शब्दों को कार्य में बदलेगा या फिर इस ‘आधारहीन आशा’ को ही साकार समझेगा।

Published: May 4, 2026