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Category: शहर

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भुन्नोरे में अपार्टमेंट में लगी आग: सुरक्षा गार्ड और परिवार की मौत, पड़ोसियों की उदासीनता से उभरा सामाजिक अंतर

ओडिशा की राजधानी भुन्नोरे में शुक्रवार को एक बहु-इन्नीदार अपार्टमेंट में तेज़ी से फैली आग ने तीन लोगों की मौत का कारण बनी। मृतकों में 45 वर्षीय सुरक्षा गार्ड, उसकी 42 वर्षीय पत्नी और उनकी 8 वर्षीय पोती शामिल हैं। घटना के तुरंत बाद आग विभाग, पुलिस और नगर निगम के अधिकारी स्थल पर पहुंचे, परंतु आग पर काबू पाने में कई घंटों का विलंब हुआ।

पीड़ित परिवार ने मीडिया को बताया कि वह अपार्टमेंट के निचले तल पर रहने वाले सुरक्षा गार्ड का एकमात्र परिवार था। उन्होंने कहा कि परिसर के धनी निवासी, जो ऊपरी मंजिलों में रहते हैं, न तो मदद की पेशकश की और न ही शोक व्यक्त किया। कुछ निवासियों ने तो आग बुझाने के बाद ही, जब पत्रकारों और अधिकारियों के साथियों ने स्थल त्याग दिया, तब बिखर कर प्रकट हुए।

पड़ोसियों और अपार्टमेंट प्रबंधन के प्रतिनिधियों के बयान से इस आरोप की पुष्टि हुई। एक परिचित निवासी ने कहा, “आग लगते ही हमें घबराहट हुई, पर उन लोगों ने किसी तरह का सहयोग नहीं किया जो अपने बटुए की तरह इमारत की अल्मारी को भी नहीं छोड़ते।” इस प्रकार की उदासीनता स्थानीय सामाजिक असमानता की भूख को दोबारा याद दिलाती है, जहाँ सुरक्षा गार्ड जैसे निचले वर्ग के कर्मी को भी अपमानजनक व्यवहार सहना पड़ता है।

नगर निगम ने बताया कि अग्निशामक दल को सूचना मिलने के पाँच मिनट बाद ही अपार्टमेंट तक पहुंचाया गया, परंतु शुरुआती प्रतिक्रिया में निकासी मार्गों की रुकावट और अलार्म सिस्टम की खराबी ने कार्य को कठिन बना दिया। इसके बाद नगर निगम ने सभी बहु-इन्नीदार इमारतों में अग्नि सुरक्षा निरीक्षण को त्वरित करने का आदेश जारी किया।

भुन्नोरे पुलिस ने मामले की फ़ोरेंसिक जांच शुरू कर दी है और संभावित लापरवाही को लेकर विभागीय कार्रवाई का संकेत दिया है। हालांकि, इस तरह की घटनाएँ अक्सर प्रशासनिक अक्षमताओं और सामाजिक वर्गभेद का मिश्रण पेश करती हैं, जहाँ उच्च वर्ग के निवासियों की सुरक्षा प्रोटोकॉल के प्रति उदासीनता कई बार नियामक निगरानी के साथ टकराती है।

परिवार के शोक व्यक्त करने वाले सदस्य ने कहा, “हम केवल दो क़दम नीचे तक पहुंच पाए, फिर आग ने हमें जला दिया। अब हम सिर्फ न्याय की अपील कर रहे हैं, न कि उदारता की।” यह वाक्य न केवल व्यक्तिगत दुःख बल्कि सामुदायिक जिम्मेदारी के प्रति बड़ेतर प्रश्न उठाता है।

शहर प्रशासन को इस घटना से सीख लेते हुए निवारक उपाय, स्पष्ट आपातकालीन निकासी योजना, और सभी वर्गों के निवासियों को समान सुरक्षा मानकों की गारंटी देने की जरूरत है। अन्यथा, अगली बार यह कहानी केवल एक और आँसू नहीं बल्कि सामाजिक असमानता के स्थायी प्रमाण बन कर रहेगी।

Published: May 6, 2026