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भुन्नी में रात की आग में वृद्ध दम्पति व पोते की मौत, नगर प्रशासन पर सवाल
भुनेश्वर के बड़ाबांदा क्षेत्र में आज सुबह 5 बजे के करीब एक धंधली सी घर में लगी आग ने तीन लोगों की जान ले ली – 68 वर्ष के रामनारायण पण्डित, 64 वर्ष की सुषमा पण्डित और उनका नवजात पोता। अन्य परिवारजन ने बताया कि अत्यंत ठंडी रात में अचानक धुएँ की चपेट में आकर मकान पूरी तरह जल उठी।
आग लगते ही पड़ोसियों ने तुरंत 101 के माध्यम से महानगर फायर ब्रिगेड को सूचना दी। रिपोर्टों के अनुसार, फायर ट्रक को स्थल तक पहुंचने में लगभग 12 मिनट लगे, क्योंकि संकरी गलियों और अपर्याप्त जल आपूर्ति ने गाड़ी को धीमा कर दिया। आग के शुरुआती चरण में ही फायर फाइटरों को कूड़े‑कबाड़ और ढीले इलेक्ट्रिकल वायरिंग के कारण तीव्र धुआँ साँस में लेने की परेशानी हुई। अंततः सभी तीन पीड़ितों को स्थल पर ही मृत घोषित किया गया।
स्थानीय प्रशासन ने घटना के बाद तत्काल एक जांच आदेशित किया है। नगर निगम ने कहा कि इस इलाके में कई सालों से जल-संरक्षण की सुविधा अधूरी है; कई आवासीय ब्लॉकों में जमे हुए पानी की टैंकों की ठीक से रख‑रखाव नहीं हो पाई। विशेषज्ञों ने भी बताया कि मौजूदा बिल्डिंग कोड में छोटे‑मोटे विद्युत दोषों को समय से पहले नहीं पकड़ा गया, जिससे ऐसी भयंकर त्रासदी का जोखिम बढ़ता है।
शहर की बुनियादी ढाँचा कुशलता से प्रतिक्रिया देने में असफल रहने की आलोचना करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक समूहों ने इस घटना को 'भुनेश्वर की सुरक्षा नीति का एक स्याह बिंदु' कहकर संबोधित किया। उन्होंने नगर निगम से मांग की है कि सभी पुराने आवासीय इकाइयों का इलेक्ट्रिकल ऑडिट, जल आपूर्ति नेटवर्क का पुनः नियोजन और आपातकालीन निकास मार्गों की नियमित जांच की जाए।
वहीं, फायर सर्विस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टिप्पणी की कि 'हमारे पास आज तक 45 मिनट से अधिक का कोई भी प्रतिक्रिया समय नहीं होना चाहिए था। अब हम इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि अगली बार ऐसी अनावश्यक देरी न हो।' यह बयान प्रशासनिक जिम्मेदारी की ओर इशारा करता है, जबकि वास्तविकता में कई बार बुनियादी संसाधन ही इस बात में बाधा बनते हैं।
परिवार के शोकग्रस्त सदस्य इस हादसे को 'बेहद कड़वा' कहते हुए तत्काल पुनर्वास सहायता की मांग कर रहे हैं। नगर निगम ने तत्काल राहत के तौर पर दो परिवारों को अस्थायी आश्रय एवं वित्तीय सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है, लेकिन सवाल बना रहता है कि भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोकने के लिए ठोस उपाय कब लागू होंगे।
Published: May 7, 2026