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भाजपा को सत्ता नहीं मिली, पुलिस पर कार्यकर्ताओं पर दबाव का आरोप: दिलीप घोष की कड़ी प्रतिक्रिया
पश्चिम बंगाल में फिर सत्ता‑प्रशासन का सवाल केंद्र में आया, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने राज्य की पुलिस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हाल ही में व्यापक चुनावी जीत हासिल की है, पर "सत्ता अभी भी हमारे हाथों में नहीं है"। यह बयान, मध्यमग्राम में हुए एक अचानक गोलीबारी में छत्रनाथ राथ की हत्या के तुरंत बाद आया, जो सुएंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे।
राथ को 17 मई को रात के समय मध्यमग्राम के पास शूटरों ने निशाना बनाया, जिसमें वह घातक रूप से घातक चोटों से शहाया। उसी घटना में उनका एक और सहायक भी घायल हो गया। घटना स्थल पर गश्त करने वाली पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए, घोष ने कहा कि "पुलिस ने न तो प्रतिबंधित किया और न ही अपराधियों को कुचलने की कोई कोशिश की"।
भाजपा के मतदाता दावों के बाद भी कांग्रेस‑त्रियंत्रा गठबंधन की सरकार के हाथों में रहे, और इस कारण से राज्य प्रशासन पर "संयुक्त रूप से एक धारा" का आरोप लगाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को बार‑बार पुलिस द्वारा जाँच, बेइज्जती और अधिकांश मामलों में बिना कारण हिरासत में रखा जा रहा है। इस क्रम में, कई छोटे‑स्तर के कार्यकर्ता आसपास के शहरी निकायों में सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं, जिससे स्थानीय विकास की गति धीमी हो रही है।
राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस घटना पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, पर अधिकारी यह कह रहे हैं कि मामले की साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया चल रही है। इस बीच, मध्यमग्राम के सड़कों पर आतंक की भावना बनी हुई है, जिससे दैनिक आवागमन में बाधा और व्यापारियों को डर का सामना करना पड़ रहा है।
भाजपा ने इस पर अपनी अगली समर्थन सभा में इस मुद्दे को "शासन के निष्पक्ष कार्य में गंभीर चूक" के रूप में उठाने का आश्वासन दिया है। विलंबित न्याय और अधूरी सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक भरोसा कमजोर हो रहा है, और इस पर सिविल सोसाइटी समूहों ने भी चिंता जताई है।
Published: May 7, 2026