बलिया के शिवरांपुर घाट पर मुंदन समारोह में गंगा में फिसल कर चार की मौत, दो बालिकाओं की दिवंगति
बालिया जिले के शिवरांपुर घाट पर रविवार सुबह आयोजित मुंदन समारोह के दौरान दो छोटी बालिकाओं और दो अन्य लोगों ने गंगा के तीव्र प्रवाह में फिसलकर वार्षिक जलजत्रा को एक दुखद मोड़ दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, अनुष्ठान के हिस्से के रूप में बच्चे और कुछ वृद्धजन नदी के किनारे स्नान कर रहे थे, जब अचानक तेज़ धारा ने उन्हें खींच लिया।
घटना के बाद तुरंत दो स्थानीय डाइवर्स और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) ने बचाव कार्य शुरू किया। बदकिस्मती से बचाव दल को मृत शरीर ही मिल पाए; कोई जीवित बचाव नहीं हो सका। सभी चार शहीदों के शव को बाद में तट पर लाकर ज़ाकिर के लिए ले जाया गया।
प्रशासन की तरफ से तत्काल कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन ने घटना स्थल की सुरक्षा को लेकर जांच का आदेश दिया और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए गंगा घाटों पर रक्षक दल की तैनाती का प्रस्ताव रखा। परंतु स्थानीय निवासियों ने पहले से ही इस क्षेत्र में औपचारिक सुरक्षा उपायों की कमी की ओर इशारा किया था; कई सालों से घाट पर बाढ़-प्रकृति के कारण दुर्घटनाओं की खबरें आती रही हैं।
बच्चों की मूरत के साथ धार्मिक रीति-रिवाजों को आगे बढ़ाने की इच्छा और जल के अति‑विस्तीर्ण और खतरनाक प्रवाह के बीच स्पष्ट नज़रअंदाज़ी ने इस त्रासदी को जन्म दिया। प्रशासनिक आलोचना का मुख्य बिंदु यह है कि आधिकारिक तौर पर नदी किनारे कोई लाइफ़गार्ड या चेतावनी संकेत नहीं थे, जबकि निर्वाचन क्षेत्र में कई बार अतीत में इसी तरह की घटनाएं घटी हैं।
परिवारों के लिए यह भारी नुकसान है, और सामाजिक मीडिया पर शोक संवेदना के साथ-साथ प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि भविष्य में ऐसी अनियंत्रित धार्मिक सभाओं को कैसे सुरक्षित बनाया जाए। यह घटना फिर से याद दिलाती है कि धार्मिक उत्सव और प्राकृतिक आपदा के बीच संतुलन बनाना केवल विभागीय आदेशों से नहीं, बल्कि सशक्त निरीक्षण और सतर्कता से सम्भव है।
Published: May 3, 2026