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बर्लिया में जश्न की गोलीबारी से 10 साल के बच्चे की मौत, असम राइफल्स जावन को हिरासत में

उर्द्ध प्रदेश के बर्लिया में असम राइफल्स द्वारा आयोजित एक उत्सव‑समारोह के दौरान गरघराबा हुई जश्न‑भरी गोलीबारी में 10 वर्षीय बच्चा मार दिया गया। घटनास्थल पर त्वरित जांच के पश्चात् एक जावन को अपराधी के रूप में गिरफ्तार कर अबरुद्ध किया गया है।

स्थानीय जनसंख्या का कहना है कि यह घटना रात के समय एक स्थानीय उत्सव के बाद हुई, जब असम राइफल्स के बंटे हुए पर्ची पर “जश्न‑गोलाबारी” की अनुमति का कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला था। मलबे की गूँज में तबीयत‑टुटी बच्ची की लाश निकाली गयी, जबकि अनेक नागरिक भी चोटिल हुए।

बर्लिया की पुलिस ने इस घटना को ‘सामूहिक लापरवाही’ का दर्जा दिया और तत्क्षण असम राइफल्स के कमांडर को लिखित प्रश्नावली भेजी। उसी समय, जिला प्रशासन ने सुरक्षा उपायों की समीक्षा का आदेश देते हुए सभी बड़ोसर के तहत अतिवादी कस्टम डिवाइसेज (कोऑर्डिनेटेड फायर) को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा।

हालांकि, इस तरह की “उत्सव‑गोलाबारी” पर प्रतिबंध के नियम पहले से ही केंद्र सरकार के अधीन स्पष्ट रूप से लिखे हुए हैं। यह प्रश्न उठता है कि नियमों को कागज़ पर क्यों टिका रखा जाए, जब उनका उल्लंघन हाथों‑हाथ हो रहा हो। “जब मुबारकबाद की गूँज में बन जाता है शोक, तो समाधान किसको मिलेगा?” इस पर सामाजिक मीडिया पर हल्की‑फुल्की विडंबना देखने को मिली, परन्तु इसे प्रभावी प्रशासनिक सुधार में बदलना अभी लंबा सफ़र है।

परिवार के सदस्य और स्थानीय लोग अब न्याय के साथ-साथ पुनः ऐसी घटनाओं को रोकने हेतु सख़्त प्रतिकार की मांग कर रहे हैं। असम राइफल्स ने अभिव्यक्त किया है कि वह “घटना की गंभीरता को समझता है” और “जिम्मेदार अधिकारी को उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई दी जाएगी”। फिर भी, निकट भविष्य में सुरक्षा मानकों की सख़्त निगरानी व शौर्यपूर्ण प्रशिक्षण को लागू करने की आवश्यकता स्पष्ट है।

इस घटना ने न केवल असम राइफल्स की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की तत्परता और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर भी प्रकाश डालते हैं। एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि प्रतिबंधित ‘जश्न‑गोलाबारी’ को सिर्फ कागज़ी आदेश नहीं, बल्कि वास्तविक क़दमों से ही ठेस लगाई जा सकती है।

Published: May 4, 2026