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Category: शहर

बक्सर के विधायक ने पुलिस के एन्काउंटर को समर्थन दिया

बिहार के बक्सर जिले में 2 मई को पुलिस ने एक दमनात्मक एन्काउंटर किया, जिसमें दो संदिग्ध मारहूँ हुए और एक घायल रह गया। घटनास्थल से तत्क्षण ही स्थानीय मीडिया ने इस गिरफ़्तारी को निहितार्थ‑भरे रूप में प्रस्तुत किया, जिससे जनमत में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ उभरीं।

घटनाक्रांत उसी दिन बक्सर के विधायिक सदस्य, श्री अमरनाथ सिंह ने सार्वजनिक बैठक में पुलिस कार्रवाई का ‘स्थायीत्व’ और ‘शहर के कानून‑व्यवस्था’ के लिए ‘आवश्यक’ होने का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “जब अपराधी हाथ में हथियार लेकर छिपे होते हैं, तो पुलिस को तेज़ कदम उठाने का हक़ है; हमारा कर्तव्य है उन पर भरोसा रखना।”

इस टिप्पणी ने तुरंत ही राजनीतिक विरोधियों और मानवाधिकार संगठनों से तीखी प्रतिक्रिया बुला ली। विपक्षी दल के प्रतिनिधियों ने इसे ‘अविवेचित न्यायिक प्रक्रिया का त्याग’ तथा ‘अधिकारियों को बाहर से वैधता प्रदान करने की घिनौनी प्रवृत्ति’ कहा। स्थानीय नागरिक समूहों ने भी चिंता जताते हुए कहा कि एन्काउंटर के बाद कोई स्वतंत्र जांच नहीं हो रही है, जिससे पुलिस के ‘ड्रॉएज’ के दायरे में अनियंत्रित शक्ति बढ़ रही है।

बिहार सरकार ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, पर जिला प्रशासन ने घटना की त्वरित रिपोर्ट एकत्र करने और स्थानीय पुलिस के कार्यप्रणाली का आंतरिक मूल्यांकन करने का उल्लेख किया। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में राज्य भर में एन्काउंटर‑बढ़ती प्रवृत्ति के सामने प्रशासनिक जवाबदेही में कमी के संकेत मिले हैं, जो आम जनता के भरोसे को धूमिल कर रहे हैं।

साथ ही, इस एन्काउंटर से प्रभावित परिवारों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति भी बिगड़ी है; मृत व्यक्तियों के परिवारों ने न्याय मांगते हुए कहा कि “पुलिस ने न सिर्फ़ जीवन समाप्त किया, बल्कि हमारे भविष्य की आशा भी छीन ली।”

पॉलिसी विश्लेषकों का मानना है कि विधायक का समर्थन इत्मीनान‑भरी शासन शैली को सुदृढ़ कर रहा है, जहाँ ‘सुरक्षा’ को बहाने के रूप में पेश कर अत्यधिक शक्ति का प्रयोग सामान्य हो रहा है। इस पर निरंरित कर, सामाजिक संतुलन की रक्षा हेतु पारदर्शी जांच और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा, नहीं तो ‘कानून के नाम पर शक्ति’ का नाटक अंततः लोकतांत्रिक संस्थानों की विश्वसनीयता को घटा देगा।

Published: May 4, 2026