जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: शहर

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

बिहार सरकार ने हाईवे पर ई‑वी चार्जिंग स्टेशन के विस्तार की योजना घोषित की

बिहार के परिवहन विभाग ने आज एक विस्तृत योजना का खुलासा किया, जिसके तहत राज्य के प्रमुख राजमार्गों पर धाबा, होटल और पेट्रोल पंप जैसी सार्वजनिक सुविधाओं में इलेक्ट्रिक वाहन (ई‑वी) चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। यह पहल केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित 400 इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन के साथ सामंजस्य बिठाते हुए, प्रदेश में ग्रीन ट्रांसपोर्ट के वादे को वास्तविकता में बदलने की कोशिश करती है।

योजना के अनुसार, चार्जिंग पॉइंट्स को राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) 31, 19 और कई राज्य मार्गों पर क्रमबद्ध रूप से स्थापित किया जाएगा, जिससे लंबी दूरी की यात्रा पर ई‑वी चालक को ‘धाबा‑हॉटेल‑पेट्रोल पंप’ त्रिकोणीय चार्जिंग नेटवर्क मिल सके। प्रशासन ने बताया कि प्रत्येक स्टेशन में दो से तीन तेज़ चार्जिंग यंत्र लगेंगे, जो 30 मिनट में 80% बैटरी चार्ज कर सकेंगे।

हालांकि यह सुनहरा प्रस्ताव सतही तौर पर आकर्षक है, परन्तु वह कई प्रशासनिक और व्यावहारिक चुनौतियों से अछूता नहीं है। पिछले दो वर्षों में बिहार में कई हाईवे विकास परियोजनाओं को जमीन‑संबंधी विवाद, अनुबंध में देर, तथा नियोजन में असंगतियों के कारण बाधित होना पड़ा है। इसी सिलसिले में प्रश्न उठता है कि क्या नई चार्जिंग सुविधाओं के लिये आवश्यक स्थलीय सहमति और फंडिंग समय पर जुटाई जाएगी।

इसी के साथ, प्रदेश में अभी तक इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये उपयुक्त भुगतान प्रणाली, मूल्य निर्धारण और उपयोगकर्ता अनुकूल इंटरफ़ेस की कमी भी ज्ञात है। अगर इन बुनियादी बातों का साफ़-साफ़ समाधान नहीं हुआ, तो बसों का ‘इलेक्ट्रिक बनना’ मात्र एक राजनैतिक झंडा बन कर रह सकता है, जो नागरिकों के वास्तविक लाभ को क्षीण कर देगा।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि धाबा व होटल मालिकों को अतिरिक्त विद्युत लोड के लिये अनुदान या सब्सिडी नहीं मिलने पर उनका खर्च बढ़ सकता है। पेट्रोल पंपों पर यह नई तकनीक स्थापित करने के लिये मौजूदा ईंधन‑संचालन संरचना को परिवर्तित करना पड़ेगा, जिससे अस्थायी व्यवधान और कर्मचारियों के पुनर्संरचनात्मक प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी।

इन चुनौतियों के बावजूद, प्रशासन ने कहा कि पहल में ‘पब्लिक‑प्राइवेट पार्टनरशिप’ मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे निजी निवेशकों को लाभांश के रूप में कर राहत और राजस्व साझेदारी का प्रस्ताव रखा गया है। यदि यह मॉडल सही ढंग से कार्य करता है, तो भविष्य में देश के विभिन्न राज्य भी इस मॉडल को अपनाकर अपनी हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को इलेक्ट्रिफ़ाई कर सकते हैं।

वास्तव में, जब तक चार्जिंग स्टेशन की विश्वसनीयता, सुरक्षा मानक और कीमतों को स्पष्ट नहीं किया जाता, तब तक ‘इलेक्ट्रिक बसों की सवारी’ केवल आधी कहानी होगी। इस दिशा में ठोस डेटा, नियमित निरीक्षण और सार्वजनिक प्रतिपुष्टि तंत्र की जरूरत है, ताकि नीति घोषणा से लेकर जमीन‑पर कार्यान्वयन तक का अंतराल घटाया जा सके।

संक्षेप में, बिहार की यह नई योजना आधुनिकीकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम प्रतीत होती है, पर इसका सफल कार्यान्वयन उसी गति से होना चाहिए जितनी तेज़ी से इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर आनी चाहिए। अधूरी योजना और अर्ध-तैयार बुनियादी ढांचा न केवल करदाता की उम्मीदों पर लगा पानी है, बल्कि इससे आम नागरिकों को मिलने वाले वास्तविक लाभ को भी कम कर देता है।

Published: May 9, 2026