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बिहार की गंगा प्रहरी आपदा मित्र योजना: डूबने को रोकने के लिए युवाओं को तैराकी में सशक्त बनाना

बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) ने ‘गंगा प्रहरी आपदा मित्र योजना’ का मसौदा तैयार किया है, जिसका उद्देश्य गंगा‑तटवर्ती गाँवों में वार‑वार घटित डूबने की घटनाओं को कम करना है। यह पहल स्थानीय युवाओं को तैराकी, जल‑सुरक्षा और जीवन‑रक्षक तकनीकों में प्रशिक्षित करके समुदाय‑स्तर पर जल‑आपदा प्रतिक्रिया क्षमता बनाने का प्रयत्न करती है।

राज्य के निकट 12,000 किमी नदी‑पानी के तट पर वसूली‑आधारित आँकड़े दिखाते हैं कि 2023‑2025 में डूबने की मौतें 1,200 से अधिक थीं, जिसमें अधिकतर युवा और बालक शामिल थे। राज्य सरकार का तर्क है, “यदि जल के किनारे रहने वाले लोग ही पानी को समझें, तो डुबकी नहीं, बल्कि सुरक्षा की गंध रहेगी”।

योजना के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं:

प्रशासन ने बताया कि प्रारम्भिक चरण में 3 महीने में 1,200 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने की योजना है, जिसके लिए 45 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। बजट में प्रशिक्षण सामग्री, लाइफ जैकेट, रेस्क्यू बोर्ड और सतत निगरानी हेतु मोबाइल एप्लिकेशन विकास शामिल है।

जबकि यह पहल सराहनीय लगती है, कुछ विशेषज्ञों ने इस पर ठंडी हवा भी चलायी है। जल‑सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक‑बार की प्रशिक्षण सत्र पर्याप्त नहीं; निरंतर अभ्यास, रख‑रखाव और स्थानीय प्रशासन की तत्परता आवश्यक है। साथ ही, क्षेत्रों में मौजूदा जल‑संसाधन प्रबंधन एवं बाढ़‑नियंत्रण में अक्सर लापरवाही देखी गयी है, तो “गंगा प्रहरी” को वास्तविक बचाव में कितनी प्रभावीता मिलेगी, यह समय ही बताएगा।

स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रियाएँ मिश्रित हैं। कई गाँव ने कहा कि युवा अब “पानी से डरने वाले” नहीं, बल्कि “पानी के दोस्त” बनेंगे। वहीं कुछ बुजुर्गों ने यह चिंता जतायी कि प्रशिक्षण को लेकर आर्थिक बोझ और समय‑समय पर आने वाले “दुष्कर पानी” में हो सकता है कि नई कौशल को लागू करना मुश्किल हो।

समग्र रूप से, गंगा प्रहरी आपदा मित्र योजना बिहार की जल‑सुरक्षा नीति में एक नया अध्याय जोड़ रही है। यदि इसे निरंतर मॉनिटरिंग, सामुदायिक भागीदारी और पर्याप्त फण्डिंग के साथ लागू किया गया तो यह जल‑आघात को आंकड़े‑पर‑आँकड़े कम करने में मददगार साबित हो सकती है—और शायद कुछ वर्षों में “डूबा तो बचा, बचा तो गंगा” के मौज‑मजाक को वास्तविक जीवन‑सुरक्षा में बदल देगी।

Published: May 5, 2026