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बारहवीं परीक्षा के परिणाम के बाद नर्मदा नहर में दो आत्महत्या प्रयास विफल, स्थानीय प्रशासन पर प्रश्न उठे

गुज़रात के नर्मदा नहर के किनारे स्थित छोटे शहर में, दो वरिष्ठ माध्यमिक छात्रों ने बारहवीं परीक्षा के परिणामों के बाद जीवन का अल्पकालिक अंत करने की कोशिश की। दोनों को आसपास की धारा में गिरते ही नगर पुलिस और जल सुविधा निगम के कर्मियों ने तुरंत बचा लिया।

परिणाम घोषणा के अगले ही दिन, शाम के 6 बजे के बाद, दो युवाओं ने नहर के जलस्तर से कूदने का नियम बना लिया। चौथा वर्गीकरण परिणाम उनके अपेक्षा से कम आए, जिससे उन्होंने इसे आत्महत्या का एकमात्र विकल्प माना। बचाव कार्य में जल निकाय प्रबंधन विभाग की निगरानी टीम, जल सुरक्षा गार्ड और पास के पुलिस थाने के अधिकारी शामिल हुए। तत्पश्चात, उन्हें नजदीकी सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए स्थानांतरित किया गया।

स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया त्वरित रही, परंतु घटना ने इस बात को उजागर कर दिया कि शैक्षिक परिणामों के बाद छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए सक्षम तंत्र का अभाव है। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा, "हम इस तरह के घटनाक्रम को रोकने हेतु स्कूलों में काउंसलिंग क्लीनिक स्थापित करेंगे, पर बजट के अधीन कई बाधाएँ अभी भी मौजूद हैं।"

नगर निगम द्वारा हाल ही में स्थापित सीसीटीवी कैमरों और जलस्तर की निरंतर निगरानी प्रणाली ने निस्संदेह बचाव में सहायक सिद्ध हुई। हालांकि, यह पूछना जरूरी है कि क्या तकनीक की यह सभी समस्याओं को सुलझा सकती है, जबकि वास्तविक समाधान – छात्रों के तनाव को कम करने वाली शैक्षिक नीति और तत्काल मनोवैज़िक सहायता – अभी भी धूमिल है।

आगे की कार्रवाई में पुलिस ने मामले की फॉरेंसिक जांच का आदेश दिया, जबकि जिले के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्कूलों में अस्थायी मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया। यह कदम प्रशंसनीय है, परंतु इसे सतत रूप से लागू करने की आवश्यकता है, नहीं तो नहर किनारे का यह “आखिरी कदम” फिर से सुनवाई के लिए दस्तावेज़ बन जाएगा।

एक शहर जहाँ जल सुविधाओं की निरंतर देखभाल के लिए विस्तृत प्रबंधन संरचना मौजूद है, वहीं छात्रों के मानसिक कल्याण के लिए बुनियादी ढांचा फिर भी ‘छतरी’ में फंसा प्रतीत होता है। यह घटना प्रशासन को यह स्मरण कराती है कि परीक्षा के परिणाम केवल अंक नहीं, बल्कि जीवन की दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं, और इस दिशा को सकारात्मक रूप से मोड़ने की जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकारी होती है।

Published: May 6, 2026