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बोरीवली रेलवे स्टेशन पर कॉलेज छात्रा को लिंगी उत्पीड़न, पुलिस ने 55 वर्षीय सतही प्रवासी को गिरफ्तार किया
मुंबई के बोरिवली रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म‑3 पर एक 21 वर्षीय कॉलेज छात्रा को लिंगी उत्पीड़न का झटका लगा, जब वह स्थानीय ट्रेन का इंतजार कर रही थी। शिकायत पर तुरंत घटना स्थल पर मौजूद सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) ने 55 वर्षीया सतही प्रवासी को पकड़ लिया।
विधान-सम्बन्धी अपराध के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को स्थानीय पुलिस थाने में बेजोड़ किया गया। अभियुक्त ने इस पूर्वव्यापी आरोप को नकारा, परंतु पुलिस के त्वरित कार्यवाही को व्याख्यानात्मक सराहा गया।
घटना ने भारतीय रेलवे के सुरक्षा प्रबंधन को फिर से सवालों के घेरे में डाल दिया। प्लेटफ़ॉर्म पर सीसीटीवी कैमरों की कमी, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होना और भीड़भाड़ वाले समय में निगरानी कर्मियों की अपर्याप्तता ऐसी ही कई घटनाओं की बुनियाद बनती रही है। जहां औपचारिक तौर पर हर प्लेटफ़ॉर्म पर ‘भेद्य स्थान’ (vulnerable spots) को चिन्हित कर सुरक्षा बल तैनात करने का आदेश है, वहीं व्यावहारिक रूप से उस आदेश की पूर्ति कई बार अधूरी रह जाती है।
नगर निगम और भारतीय रेलवे के बीच समन्वय की कमी भी सामने आई। बोरिवली के जैसे प्री-फैशन स्टेशनों पर सड़कों के बजाय प्लेटफ़ॉर्म पर ही आवासरहित लोगों का सत्रहीन अस्तित्व जमीनी सुरक्षा को और अधिक जटिल बनाता है। इस संदर्भ में, एक उपयुक्त ‘रिप्रोग्रामिंग’ योजना—जिसमें स्थल पर हटाने, पुनर्वास और सतही प्रवासियों को वैकल्पिक आवास प्रदान करना शामिल हो—की आवश्यकता स्पष्ट हो गई है।
बोरिवली स्टेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा, “हम प्लेटफ़ॉर्म पर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और महिला यात्रियों के लिए अलग इंतजाम करने पर विचार कर रहे हैं।” हालांकि, इस तरह के सार्वजनिक बयानों को अक्सर ‘कदम सोचकर’ कहा जाता है, क्योंकि वास्तविक कार्यान्वयन में कई बार देरी और संसाधन की कमी बाधा बनती है।
इस घटना के बाद, सामाजिक मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने महिला यात्रियों के लिए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने की मांग की, जबकि कुछ ने सतही प्रवासियों के प्रति सहानुभूति भी व्यक्त की। लेकिन समाचार पत्रों और प्रमुख टेलीविज़न चैनलों ने स्पष्ट रूप से कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर ‘सुरक्षा कवच’ केवल शब्दावली नहीं होना चाहिए; इसे व्यावहारिक रूप से अनुष्ठान में बदलना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रकार की घटनाएँ न केवल पीड़िता को मानसिक आघात पहुंचाती हैं, बल्कि सामान्य जनता के सार्वजनिक परिवहन पर भरोसे को भी ध्वस्त करती हैं। इस संदर्भ में, रेलवे प्रशासन को एक व्यापक सुरक्षा ऑडिट, नियमित रूप से थ्रेडेड एम्बेडेड मॉनिटरिंग और संविदा‑आधारित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के साथ तत्काल सुधार कदम उठाने की जरूरत है।
Published: May 6, 2026