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बोध गया में विदेशी मठों की व्यावसायिक गतिविधियों की जांच में समिति ने डेडलाइन चूक ली
गया जिले के धार्मिक पर्यटन स्थल बोध गया में विदेशी मठों द्वारा धारा प्रवाह को बढ़ाने के चक्रव्यूह में धरा में धूम्रपान के रूप में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगा था। एक जनहित याचिका के मद्देनज़र राज्य सरकार ने एक विशेष जांच समिति गठित की, जिसका काम मठों द्वारा वस्तु‑विक्रय, अतिथ्य व्यवस्था और अन्य वाणिज्यिक कारोबारों की वैधता व स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव का आकलन करना था।
समिति को 30 इंटरवेंस के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था, परन्तु नियत तिथि पर कोई दस्तावेज़ नहीं मिला। स्रोतों ने बताया कि या तो दस्तावेज़ तैयार नहीं हुआ, या समिति अपने स्वयं के कार्य‑प्रवाह में उलझी हुई थी—जैसे किसी मठ के आकर्षक शिल्प वस्तु की कीमत तय होने में कई महीने लगते हैं। इस देरी ने न केवल सार्वजनिक भरोसा घटाया, बल्कि बोध गया के स्थानीय व्यापारियों को भी आर्थिक अस्थिरता के आँच में धकेल दिया, जो अब भी निवारक उपायों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
नगर निकाय के अधिकारियों ने कहा कि मठों के पास ‘अंतरराष्ट्रीय धार्मिक संस्था’ की विशेष स्थिति है, जिससे उनकी आर्थिक गतिविधियों को सावधानी से देखना आवश्यक है। परन्तु इस स्थिति का दुरुपयोग करते हुए कई मठों ने अपने परिसर में उपहार‑वस्तु की दुकानें और अतिथि गृह स्थापित कर लिये, जिससे स्थानीय दुकानों और छोटा‑बड़ा होटल उद्योग दो-तीन कदम पीछे रह गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बोध गया जैसे पवित्र स्थल पर वाणिज्यिक अतिक्रमण को रोकने के लिये स्पष्ट नियामक फ्रेमवर्क और सक्रिय निगरानी आवश्यक है। “यदि आध्यात्मिक पर्यटन को एक अत्यधिक व्यवस्थित शॉपिंग मॉल में बदल दिया जाए, तो असल में वह प्रवासी पर्यटक नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापारी का घाव बन जाता है,” एक शहरी योजना विशेषज्ञ ने उल्लेख किया।
अब प्रशासनिक दबाव बढ़ रहा है। जिला परिषद ने समिति को दो सप्ताह अतिरिक्त समय दिया है, परन्तु इस निर्णय को अक्सर “रिपोर्ट‑पैड के पन्नों की भर्ती” के रूप में देखा जाता है, जहां असल में कार्यवाही की गति के बजाय कागजी काम के चक्कर दिखते हैं।
बोध गया की नगरपालिका इस मुद्दे को अतिरिक्त संसाधन आवंटित करके सुलझाने की तैयारी जताई है, परन्तु अभ्यर्थी नागरिकों और स्थानीय व्यापारियों को अब भी यह सवाल है—क्या यह प्रशासनिक “परीक्षण” केवल शब्दों की बिम्बीला है या वास्तविक कार्रवाई की शुरुआत होगी? समय ही दिखाएगा कि बोध गया के पवित्र पथ पर व्यावसायिक अतिक्रमण को रोकने के लिये नियामकों ने अपना “धर्म‑धंधा” संतुलित कर पाएँगे या नहीं।
Published: May 6, 2026