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बुंदी गांव में 9 साल के बच्चे की कुत्ते के झुंड द्वारा हत्या, कूड़े प्रबंधन में प्रशासनिक कमज़ोरी उजागर

रुजस्तान के बुंदी तालुका के एक छोटे से गाँव में 5 मई को दोपहर के समय एक 9 वर्षीय लड़के का कुत्ते के झुंड द्वारा हमला कर उसे घातक चोटें पहुंचाकर मृत्यु हो गई। पास के एक घर के मुखिया ने बताया कि बच्चा अपने घर के पास मौजूदा कूड़े की ढेरियों के पास खेल रहा था, जहाँ कई आवारा कुत्ते अक्सर आकर शिकार की तलाश में रहते हैं।

स्थानीय पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया, FIR के साथ दो कुत्तों को पकड़ कर मारने की अनुमति भी बरती। मृत बच्चे के परिवार को तत्काल राहत के तौर पर 5 लाख रुपये की सरकारी सहायता की घोषणा की गई, जबकि सतह पर मिलने वाले न्यायिक उपायों का क्रम अभी भी जारी है।

इस घटना को लेकर गाँव में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। कई नागरिकों ने बुनियादी ढाँचे की लापरवाही की ओर इशारा किया — विशेषकर कूड़े का उचित निपटारा न हो पाना, जिससे कुत्तों को सहज भोजन उपलब्ध हो रहा है। बुंदी नगरपालिका के अधिसूचना के अनुसार, इस साल के लिए कूड़ा संग्रहण के अनुबंध को दोबारा नवीनीकृत करने की प्रक्रिया चल रही थी, परन्तु ग्रामीण इलाकों में कवरेज अभी तक पूर्ण नहीं हुआ है।

नगर पालिका ने घटना के बाद तत्काल दो कदम उठाने की घोषणा की: प्रथम, बेकाबू आवारा कुत्तों के लिए एबीसी (Animal Birth Control) कार्यक्रम को तेज करना और मौजूदा कुत्तों को बंधुआन में ले जाकर टीका‑कट लगाना; द्वितीय, गाँवीय क्षेत्रों में कूड़ा निपटान के लिये अतिरिक्त बिन और नियमित संग्रहण शेड्यूल लागू करना। हालांकि, इन उपायों को लागू करने में निपुणता, बजट आवंटन और निगरानी की कमी के कारण पहले से ही कई मायदे में निराशा पाई गई है।

शहरी प्रशासन की इस तरह की लापरवाही को लेकर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और ग्राम परिषद सदस्य ने आह्वान किया कि न केवल आवारा कुत्तों का नियंत्रण, बल्कि कूड़े के संग्रहण व निपटान व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार हो। उन्होंने कहा, “जब कूड़े के ढेर से कुत्ते आकर्षित होते हैं, तो यह सिर्फ पशु‑मानव टकराव नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का परिणाम है।”

आगामी सप्ताह में जिला प्रशासन की एक विशेष टीम इस मामले की जाँच, राहत वितरण और दीर्घकालिक समाधान के लिए प्रस्तावित करेगी। इस दौरान, बुंदी गांव के निवासियों की आशा है कि यह त्रासदी दोहर न हो और बुनियादी सुविधा‑प्रबंधन में सुधार के अनुभवात्मक कदम उठाए जाएँ।

Published: May 5, 2026