विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?
आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें।
बिथोरा में बाइसन ने गृह रक्षक की जान ले ली, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मध्य प्रदेश के बेथोरा नगर में कल दोपहर 3 बजे लगभग एक बाइसन ने गृह रक्षक राजेश कुमार (35) को धक्के में मार कर उसकी मौत का कारण बन गया। यह घटना नगर के वन-परिसर के सन्निकट बस्तियों में घटित हुई, जहाँ बाइसन का आवागमन नियमित रूप से देखा जाता है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने स्थल पर पहुंचकर प्राथमिक जांच शुरू की। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, रक्षक उस समय वन विभाग के साथ सहयोग में बाइसन की निगरानी कर रहा था, जब पशु अचानक काबू से बाहर होकर उसकी ओर बढ़ा। रक्षक ने बचाव का प्रयास किया, परंतु गंभीर चोटों के कारण वह मौके पर ही चल बसा।
बेथोरा के जिला कलेक्टर ने आज सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “वन्य जीवों के साथ सहअस्तित्व वाकई चुनौतीपूर्ण है, परन्तु इन परिस्थितियों में सुरक्षा उपायों की कमी अनदेखी नहीं की जा सकती। हम तुरंत वन विभाग, पुलिस और गृह रक्षक संघ के साथ मिलकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि मृतक के परिवार को उचित वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
वन विभाग की ओर से भी टिप्पणी मिली, जिसमें बताया गया कि बाइसन का प्राकृतिक आवास धीरे‑धीरे घट रहा है और वे स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बाइसन के लिये सुरक्षित गेटवे स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। विभाग ने यह उजागर किया कि वर्तमान में बाइसन की आबादी पर्याप्त नहीं है, इसलिए उनके जीवन‑संकट को घटाने हेतु सुरक्षा बाड़ और चेतावनी संकेतक स्थापित करने की त्वरित आवश्यकता है।
वहीं, नागरिक संगठनों ने इस घटना को “समय से पहले ही उपायों की चूक” कहा। बेथोरा नगर परिषद के प्रतिनिधि ने कहा, “भवन निर्माण, जंगल कटाई और बुनियादी ढांचे की बेहतरी के बाद भी, हमें बाइसन जैसे बड़े वन्य जीवों के लिये विशेष फुटपाथ नहीं बना पाए हैं। यह त्रुटि अब एक मानव जीवन की कीमत पर सामने आई है।”
स्थानीय लोगों ने भी इस बात पर चिंता जताई कि बाइसन के बार‑बार आने से गाँव के बाग़, पालतू पशु और किसान भी जोखिम में हैं। कई सोशल‑मीडिया उपयोगकर्ताओं ने टिप्पणी की कि “वन्य जीवों के संरक्षण का मतलब यह नहीं कि सामान्य नागरिकों को खतरे में डालना हमारा कर्तव्य हो।”
प्रशासनिक कदमों में तुरंत बाइसन की आवागमन वाली सड़क पर अतिरिक्त संकेतक लगाना, शाम‑शाम गश्त बढ़ाना, तथा निकटवर्ती गाँवों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना शामिल है। साथ ही, यह भी कहा गया कि भविष्य में बाइसन के लिये वन‑परिसर में अधिक सुरक्षित ‘कोरिया’ (कॉन्ट्रोल एरिया) स्थापित करने की योजना के तहत बजट हिस्सा तय किया जा रहा है।
इस हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया कि वन्य जीव प्रबंधन और स्थानीय सुरक्षा के बीच समन्वय की कमी नागरिकों के जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकती है। अभी के लिए, मृतक के परिवार को वित्तीय राहत और शोक-संताप प्रदान किया जा रहा है, जबकि प्रशासन को बाइसन सहित बड़े वन्य जीवों के प्रति एक ठोस, व्यावहारिक और दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति तैयार करने की चैलेंज का सामना करना पड़ेगा।
Published: May 7, 2026