बीड में पिता ने दो नाबालिग बेटियों को डीज़ल से जलाने की कोशिश, प्रशासनिक सुरक्षा पर सवाल
महाराष्ट्र के बीड में एक पारिवारिक झगड़े के दौरान, पिता ने अपनी दो नाबालिग बेटियों पर डीसल डालकर उन्हें जलाने की कोशिश की। घटना उसी समय हुई जब माँ ने घर लौटने से इनकार कर दिया, जिससे पिता का गुस्सा बढ़ गया। सौभाग्य से एक रिश्तेदार ने तुरंत मैचे बॉक्स छीन लिया और बच्चों को बचा लिया।
स्थानीय पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की। ऑन‑साइट टीम ने फायर‑ब्रिगेड को बुलाया, घटना स्थल पर मौजूद डीसल को सुरक्षित रूप से जमा किया और दो बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद सामाजिक कार्य विभाग को सौंप दिया। पुलिस ने पिता के खिलाफ जड जुल्म, बालाक्रूरता और कधवर्जन के धाराओं में FIR दर्ज की।
बीड शहर की बाल संरक्षण बोर्ड (बैलंगक संरक्षण समिति) को इस दुर्घटना की सूचना दी गई और वह तत्काल पीड़ितों की सुरक्षा तथा मनोवैज्ञानिक समर्थन के लिए उपाय कर रही है। साथ ही, महिला एवं बाल विकास विभाग ने मामले की जांच के साथ ही परिवारिक हिंसा रोकने के लिये निवारक कदमों की सिफारिश भी की है।
हालांकि, इस घटना ने नगर प्रशासन की दोहरी विफलता को उजागर कर दिया है: एक ओर जल आपूर्ति के लिये डीसल का उपयोग, और दूसरी ओर घरेलू हिंसा के प्रति त्वरित निवारक उपायों का अभाव। बीड में अक्सर पानी की कमी के कारण डीसल को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में प्रयोग किया जाता है, पर जब यही माध्यम घर के भीतर हत्यात्मक कार्य में बदल जाए तो प्रशासन को अपने सुरक्षा ढांचे की जाँच करनी चाहिए।
स्थानीय अधिकारी इस बात पर तर्क दे रहे हैं कि उन्होंने पहले से ही घरेलू हिंसा संबंधी जागरूकता अभियानों को प्रोत्साहित किया है, पर वास्तविकता में, ऐसी घटनाएँ संकेत करती हैं कि नीतियों का क्रियान्वयन अभी भी कच्चे हाथों में है। सामाजिक कार्यकर्ता और निजी वकील इस बात पर बल दे रहे हैं कि पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा आदेश और आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए, और दंशित पिता को कठोरतम सजा के साथ सामाजिक पुनर्वास कार्यक्रम में भागीदारी अनिवार्य की जानी चाहिए।
इस त्रासद घटना ने बीड के नागरिकों में डर के साथ-साथ सवाल भी खड़े कर दिया है कि क्या नगर परिषद, पुलिस तथा स्वास्थ्य सेवाएँ मिलकर घरेलू हिंसा के लिए एक प्रभावी ‘एक-स्टॉप’ समाधान प्रदान कर पा रही हैं। जब तक स्थानीय प्रशासन इन प्रश्नों का ठोस उत्तर नहीं देता, तब तक ऐसे दर्दनाक मामलों की पुनरावृत्ति से बचना मात्र शब्दों का खेल बना रहेगा।
Published: May 5, 2026