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बीड़ के पूर्व ज़िला कलेक्टर को धुले‑सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग के 310 करोड़ के ज़मीनी घोटाले में गिरफ्तार किया गया
महाराष्ट्र के बीड़ जिले के पूर्व ज़िला कलेक्टर को धुले‑सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) निर्माण परियोजना से जुड़े 310 करोड़ रुपये के ज़मीनी हड़ताल घोटाले में अवैध लाभ अर्जित करने के अपराध में एन्फोर्समेंट डिरेक्टोरैट (ED) ने हिरासत में ले लिया है। जांच में यह उजागर हुआ है कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान कई नखली दस्तावेज़ तैयार कर, सरकारी जमीन को निजी रीयल एस्टेट कंपनियों को अवैध रूप से हस्तांतरित किया गया।
घोटाले की कुल राशि लगभग 310 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें सरकारी भुगतान, अधिग्रहण के लिए अतिरिक्त मुआवजे और अनुचित निर्माण अनुबंध शामिल हैं। आरोप है कि कलेक्टर ने अनुपालन की प्रक्रिया को बाधित कर, कृत्रिम रूप से मूल्यांकन को बढ़ा-चढ़ाकर निजी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया। इन ठेकेदारों को फिर सेवस, ब्याज और जुर्माने का भुगतान करके परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति मिली।
जांच का दायरा केवल बीड़ जिलासीम तक नहीं, बल्कि धुले और सोळापुर जिलों के प्रशासनिक निकायों तक फैला हुआ है। कई स्थानीय राजस्व अभियंता, वन अधिकारी और रियल एस्टेट प्रतिनिधियों को भी पूछताछ में शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के बड़े पैमाने पर ज़मीनी धोखाधड़ी से राष्ट्रीय राजमार्ग की लागत में अनावश्यक वृद्धि हुई, जिससे करदाताओं पर अतिरिक्त भार पड़ा।
स्थानीय नागरिकों ने इस विकास परियोजना को दीर्घकालिक कनेक्टिविटी सुधार का वादा कहा था, परंतु अब इस घोटाले के कारण न केवल आर्थिक नुक़सान, बल्कि सामाजिक असंतोष भी बढ़ रहा है। कई प्रभावित किसानों ने बताया कि उन्हें कभी आधिकारिक अधिग्रहण नोटिस नहीं मिला, जबकि उनकी ज़मीन को सरकारी दस्तावेज़ में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया है। इस स्थिति में, न्यायिक प्रक्रिया के समाप्त होने तक कई परिवार मौद्रिक और सामाजिक असुरक्षा में जी सकते हैं।
प्रशासन पर बढ़ती लकीरें इस बात की ओर संकेत करती हैं कि भूमि अधिग्रहण के पारदर्शी ढाँचे की कमी, समय पर निगरानी की अनुपस्थिति और अधिकारियों के दायित्व के प्रति अति सहज रवैया सार्वजनिक हित में बड़ी बाधा बन गया है। इस घोटाले की सजा अभी तय नहीं हुई है, परंतु यह उदाहरण इस बात को उजागर करता है कि राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे के बड़े प्रोजेक्ट्स में भी भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो सकती हैं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी संबंधित दस्तावेज़ों, वित्तीय लेन‑देन और ई‑मेल संचार की पूरी जाँच जारी है। यदि दोषी पाए गए, तो कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त दंड और कोर्ट‑ऑर्डर के माध्यम से अनधिकृत जमीनों को पुनः राज्य की स्वामित्व में लाया जाएगा। इस बीच, स्थानीय नागरिकों को आशा है कि इस घटना से सीख लेकर भविष्य में ऐसी परियोजनाएँ अधिक पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से आगे बढ़ेंगी।
Published: May 8, 2026