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Category: शहर

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बोझपुर के शाहपुर ब्लॉक में 52 करोड़ की कटाव-नोधी योजना मंजूर

बिहार सरकार ने गंगा किनारे स्थित बोझपुर जिले के शाहपुर ब्लॉक में जल कटाव को रोकने के लिए 52 करोड़ रुपये मूल्य का एक व्यापक anti‑erosion परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस कदम को प्रदेश के ग्रामीण पुनरुद्धार हेतु ‘भव्य’ कहा गया है, जबकि इसे कार्यान्वयन में कई वर्ष की नौकरशाही की रेत में फँसे कार्य‑योजनाओं की तुलना में आगे बढ़ते हुए देखा जा रहा है।

जुलाई 2025 में जवादिया गाँव के साथ-साथ निकटवर्ती बस्तियों में गंगा का अत्यधिक कटाव हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 200 से अधिक घर और व्यापक कृषि भूमि खराब हो गई। तब से जिले के प्रशासन और स्थानीय निवासियों ने पुनर्स्थापना हेतु कई बार अनुरोध किए, परन्तु ठोस समाधान नहीं मिल सका। इस परियोजना को इसी स्थिति का स्थायी समाधान मानकर पेश किया गया है।

परियोजना की देखरेख राज्य जल संसाधन विभाग, जिला कलेक्टर कार्यालय और स्थानीय पंचायत समिति के संयुक्त समन्वय से होगी। इसके अलावा राष्ट्रीय नदियों के संरक्षण के लिये स्थापित प्राधिकरण को तकनीकी सलाह हेतु बुलाया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो कि ‘कटाव‑निरोध’ शब्द केवल प्रचार‑अनुष्ठान न रह जाए।

योजना के तहत गंगा के किनारे को रिटेनिंग दीवारों, रिपैप (छोटे पत्थर) और जियो‑टेक्निकल पुनर्स्थापना द्वारा मजबूत किया जायेगा। साथ ही, बिचीकुस की संकुचन और बाढ़‑प्रबंधन के लिये नई जल‑विद्युत ढाँचागत सुविधाएँ स्थापित की जाएँगी। कार्य को दो वर्षों के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य है, जिसमें 70% बजट राज्य तथा 30% केंद्र से मिलने वाले अनुदान से पूरित होगा।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह पहल कई सालों से चली आ रही ‘वादा‑प्रकाशन’ की शृंखला को तोड़ने की उम्मीद जगाती है। फिर भी, पिछले कई विकास कार्यों में समयसीमा के साथ‑साथ पारदर्शी खर्चा‑रिपोर्टिंग की कमी देखी गयी है, जिससे पहले के “वित्तीय‑प्रकाशित” योजनाओं को ‘कागज़ी पर ही रहना’ का खेद मिलता रहा। इस परियोजना में भी निगरानी के लिये सोशल‑ऑडिट एवं सार्वजनिक मंच स्थापित किए जाने की मांग स्पष्ट रूप से उठी है।

यदि इस योजना को समय‑सीमा, नियोजित सामग्री और स्थानीय सहभागिता के साथ सटीकता से लागू किया गया, तो जवादिया और आसपास के कई गाँवों को पुनः स्थायित्व की दिशा में एक कदम आगे ले जाया जा सकेगा। अन्यथा, यह फिर से ‘सोते हुए बैंकों’ की एक और सूची बन सकती है, जहाँ योजनाएँ मंजूर हों पर धरती पर उनका कोई निशान न बचे।

Published: May 8, 2026