बिजली की बौछार से दिल्ली में ठंडक, वायु गुणवत्ता सुधरी; उड़ानों पर हुई बाधा
कल शाम दिल्ली में आया तीव्र गरज-बारिश का झोंका, जिसने शहर के तापमान को औसतन दो डिग्री घटा दिया। इंडियन मीटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने बताया कि इस ठंडक के साथ-साथ मौसम‑संवेदनशील प्रदूषण कणों की सांद्रता में भी उल्लेखनीय कमी आई। शाम 7 बजे तक राष्ट्रीय पर्यावरण सूचना प्रणाली (NEMIS) ने दिल्ली के विभिन्न मानचित्रों में AQI को ‘स्वस्थ’ श्रेणी में उतारा, जबकि सामान्यतः गर्मियों में यह मानक ‘सेहत ख़तरे में’ रहता है।
प्रदान किए गए आंकड़ों के अनुसार, पीएम 2.5 स्तर 150 µg/m³ से गिरकर 78 µg/m³ तक आया, जिससे उन लोगों की राहत हुई जिन्होंने लगातार धुंध में साँस लेने के लिए मास्क खरीदा था। हालांकि, इस मौसमी राहत को लेकर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने संकेत दिया कि यह अस्थायी है और स्थायी सुधार के लिये श्वेत‑पत्रिकाओं में लिखी गई औद्योगिक एवं वाहन‑उत्सर्जन सीमाओं का पालन आवश्यक है।
वहीं, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर इस मौसम ने अपनी अलग ही परिछा ली। तेज़ हवाओं और अचानक बिजली गिरने की रिपोर्ट से उड़ान प्रबंधन ने 12 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द या स्थगित करने का निर्णय लिया। प्रवासी यात्रियों को अनपेक्षित प्रतीक्षा के साथ-साथ अतिरिक्त वैधता शुल्क भी चुकाना पड़ा। दिल्ली हवाई अड्डा प्राधिकरण (DAA) ने कहा कि “सुरक्षा प्रथम” के सिद्धांत के तहत ऐसे मौसमी व्यवधान को टाला नहीं जा सकता, परन्तु भविष्य में बेहतर मौसम‑अधारित प्रबंधन हेतु अतिरिक्त एरर‑प्रोटोकॉल लागू करने की योजना है।
इस बौछार से निचले-स्तर की कुछ सेवाओं पर भी असर पड़ा। कई मोहल्लों में बिजली कटौती के कारण जलकुंभी और एलईडी लाइटों में रोशनी अंधेरी हो गई, जिससे स्थानीय प्रशासन पर “बिजली के साथ ही वायु भी साफ़ करो” की व्यंग्यात्मक टिप्पणी उभरी। नगर निगम ने अत्यधिक वर्षा के कारण हुए जल निकासी में गड़बड़ी को स्वीकार किया और अगले दो हफ्तों में 150 करोड़ रुपये के बजट से अनिवार्य ड्रेनेज‑मेटर स्थापित करने की घोषणा की।
नागरिकों ने राहत की सांस ली है, परंतु यह स्पष्ट है कि मौसमी शीतलता सहारा नहीं, समाधान नहीं। प्रशासनिक खर्च और दीर्घकालिक प्रदूषण नियंत्रण के बीच संतुलन बनाते हुए, दिल्ली के प्रबंधकों को अब केवल बौछार के इंतजार में नहीं, बल्कि हर दिन साफ़ हवा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
Published: May 5, 2026