बीजेपी ने उमरेठ में जीत दर्ज की, हरषद परमार से 30,743 वोटों का अंतर
गुजरात के अहमदाबाद जिले के तालुका उमरेठ में हुए विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय दक्षता के घोरे को फिर से शानदार जीत मिली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार हरषद परमार ने प्रतिद्वंद्वी मोडिशन कांग्रेस के उम्मीदवार को 30,743 वोटों के अंतर से पीछे छोड़ते हुए सीट संभाली।
कुल मतदाता सूची में 2,01,467 नामांकित मतदाता थे, जिनमें मतदान अनुपात 71.4 प्रतिशत दर्ज हुआ। इस आंकड़े को देखते हुए यह स्पष्ट है कि बहुलता से मतदाता भागीदारी रही, परन्तु मुख्य प्रश्न यह है कि इस भागीदारी को किस हद तक मण्डलीकरण और वरीयता‑सँझा किए गए विकासात्मक मुद्दों ने प्रेरित किया।
उमरेठ, जो एक समय कृषि‑केंद्रित छोटे शहर के रूप में जाना जाता था, आज जल‑संकट, सड़कों की दरारें और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। इस चुनावी प्रतिज्ञा में अधिकांश प्रमुख पार्टियों ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, बुनियादी सुविधाओं की सुधार योजना पर बल दिया, परन्तु पिछले पाँच वर्षों में शहरी विकास की गति काफी धीमी रही।
हरषद परमार, जो इस बार पार्टी के दोहरे ध्वज (विकास-शासन) को अपनाते हुए अपना प्री-एडवोकेसी मंच प्रस्तुत किया, ने वादे किए कि जल सत्रह (जलग्रहण) परियोजनाओं को दो साल में पूरा किया जाएगा, शहर के मुख्य बाजार तक की सड़कों का पुर्ननिर्माण किया जाएगा तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपकरणों की उन्नति की जाएगी। हालांकि, इस प्रकार के वादे अक्सर ‘विचार‑धारणा’ की बजाय ‘पार्षद‑विज्ञापन’ बनकर रह जाते हैं।
विरोधी पक्ष से मिलने वाली प्रतिक्रिया में कहा गया कि जीत का दावा होने के साथ ही जनसेवा के वास्तविक कार्यान्वयन की जाँच को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस नई सत्ता को न केवल चुनावी वादे पूरा करने में, बल्कि नागरिक‑उन्मुख सेवाओं के निरंतर सुधार में भी संलग्न करे।
कैम्पेन के दौरान सोशल मीडिया पर निरंतर ‘विकास की गाड़ी’ का उल्लेख किया गया था, परन्तु सड़कों की धूल और खुले नालों की गड़बड़ी अभी भी नागरिकों के रोजमर्रा के जीवन में व्याप्त हैं। इस पहलू को नजरअंदाज न करना, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सच्ची योग्यता का माप है।
आगामी महीने में उमरेठ के नगरपालिका बोर्ड के साथ समन्वित कार्यशैली स्थापित करने की आशा है, ताकि चुनावी जीत को ‘स्मार्ट सिट’ बनने की रूपरेखा में बदला जा सके। जनता की आशा वही है, जिस पर प्रतिफल नहीं, बल्कि ठोस कार्यवाही का आधार हो।
Published: May 5, 2026