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बीजेपी के जालमुग़ी जश्न ने दिखाई जीत की तीखी चटनी

पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विधानसभा चुनाव में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पार्टी के कार्यकर्ता शहर‑शहर में जालमुग़ी के स्टॉल लगाकर उत्सव मनाते दिखे। जालमुग़ी, जो कोलकाता की सड़कों की स्याही‑भरी लहर है, को पार्टी ने अपने प्रचार‑प्रसार के ‘मसालेदारी’ का प्रतीक बताया।

जुए के परिणामों की आधिकारिक घोषणा के दो दिन बाद, प्रमुख वार्डों में भाजपा के स्थानीय अध्यक्ष और युवा मोर्चा के नेता, झटपट जालमुग़ी के साथ मंच पर आए, यह कहते हुए कि ‘जालमुग़ी की तीखी चटनी हमारे अभियान की चिंगारी को दर्शाती है’। इस बयान को क्रांतिकारी रैली की तरह पेश किया गया, जबकि आस‑पास के नागरिकों ने कचरा प्रबंधन में लगातार व्यवधान को नोटिस किया।

जश्न की धूम के बीच, कई मिल्स‑टाइप सड़कों पर कचरे का ढेर बढ़ा, और शहरी स्वच्छता विभाग ने इस अनियंत्रित भीड़‑भाड़ को ‘अस्थायी’ बताया। नगरपालिका के अधिकारीयों ने यह कहना चाहा कि ‘जश्न के दौरान उत्पन्न कचरे को तुरंत साफ़ किया जाएगा’, परंतु पिछली रात में ही दोनों ही कूड़ेदान ओवरफ्लो हो चुके थे, जिससे सड़कों पर बदबू और जलजमाव की समस्या उपज गई।

पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया, परन्तु सोशल‑मीडिया पर मौजूद टिप्पणी दर्शाती हैं कि ‘विचाराधीन शोर‑गुल को रोकने के बजाए जालमुग़ी की ख़ुशबू का स्वागत किया जा रहा है’। इस बात ने शहरी प्रबंधन की दोहरी नीति पर सवाल उठाए – एक ओर राजनीतिक उपस्थिति को सुदृढ़ करने हेतु, तो दूसरी ओर सामान्य नागरिक सेवाओं को तुरंत ठीक‑ठाक करने की अनिच्छा।

बंगाल में विपक्षी दल, विशेषकर तृणमूल कांग्रेस, ने इस जश्न को ‘राजनीतिक रंग में लिपटे व्यंजन’ कहा, और आरोप लगाया कि भाजपा अपने जीत को ‘खाद्य‑प्रदर्शन’ के रूप में छुपा रही है जबकि बुनियादी ढाँचा अभी भी ‘कच्ची पटल’ पर ही टिका है। उन्होंने कहा कि ‘असली खुशबू तभी आएगी जब गरीबों को रोज़गार, स्वास्थ्य एवं शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ मिलें’।

स्थानीय व्यावसायिक संघों ने भी इस अवसर को दोधारी माना। एक ओर, जालमुग़ी विक्रेता अपनी बिक्री में 30 % की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है, तो दूसरी ओर, शहरी नीतिनिर्माताओं को ‘उत्सव‑परिवहन’ की अनियमितता से मौजूदा ट्रैफ़िक जाम को संभालना पड़ेगा। इस पर मूल्यांकन रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हुई है, परन्तु यह स्पष्ट है कि ‘भोजन‑राजनीति’ के इस दौर में ठोस प्रशासनिक योजना का अभाव दिख रहा है।

जालमुग़ी के मसालेदार धुएँ के बीच, नागरिकों को अब यह तय करना होगा कि वे अपनी आवाज़ केवल मतदान तक सीमित रखें या फिर सड़कों पर ‘स्वच्छता‑और‑बुनियादी‑सेवा’ की मांग को भी उतनी ही तीखी चटनी से सजाएँ, जैसा कि इस जीत के जश्न ने दिखाया।

Published: May 5, 2026