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Category: शहर

बीजीए जीत के बाद ऑटो चालकों ने पुराने किराए पुनः अपनाए

राजस्थान के प्रमुख शहर जैपुर में पिछले सप्ताह समाप्त राज्य विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजीए) ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की। जीत के दिन, नगर निगम के नए मेयर ने अचानक एक घोषणा की – ऑटो‑रिक्शा किराये में प्रस्तावित 20 प्रतिशत वृद्धि को रद्द किया जा रहा है। यह अद्यतन नीति तुरंत शहर की सड़कों पर लागू होने के साथ ही चालक वर्ग ने डरते‑डरते पुराने किराए की रीढ़ पकड़ ली।

वर्ष 2025 में, परिवहन विभाग ने बढ़ती ईंधन कीमतों और रख‑रखाव लागत को देखते हुए ऑटो किराए में 20 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी एवं सार्वजनिक शिकायत निवारण मंच भी स्थापित किया जाएगा। उपयोगकर्ता समूह ने इस कदम को उचित बताया, पर कुछ चालक संघों ने विरोध किया, यह तर्क देते हुए कि इससे उनकी आय में कटौती होगी।

बीजीए की जीत के बाद, नई नगरपालिका के प्रमुख ने यात्रा शुल्क को ‘स्थिर’ रखने की घोषणा की, यह कहते हुए कि “छोटे व्यापारियों की रक्षा ही विकास का आधार है।” इस बयान के बाद, पुलिस विभाग ने आदेश जारी किया कि कोई भी चालक अनुशासनहीनता या अति शुल्क लेता मिला तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। परिणामस्वरूप, कई चालक अस्थायी रूप से “भयभीत” होकर, नई दरों पर लागू होने वाले दंड के डर से, तुरंत पुराने किराए पर लौट आए।

सामान्य नागरिकों ने इस उलटफेर को मिश्रित प्रतिक्रिया के साथ स्वीकार किया। एक नियमित आवागमन करने वाले रोज़गारहारी ने कहा, “हम तो बस सस्ते में यात्रा चाहते हैं, पर इस बार हमें राजनीतिक खेल के बीच फँसे हुए देखना पड़ रहा है।” दूसरी ओर, कुछ उपभोक्ता समूहों ने कहा कि किराया निर्धारण प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी है और भविष्य में ऐसी अराजकता न हो, इसके लिए स्वतंत्र मूल्य निर्धारण आयोग की जरूरत है।

पर्यवेक्षणकर्ता और स्थानीय नीति विश्लेषक इस घटना को ‘राजनीतिक प्रभाव का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब’ मानते हैं। उन्होंने कहा, “जैसे ही सत्ता का दायरा बदलता है, नीतियों में भी तुरंत बदलाव देखने को मिलते हैं। ऐसी निरंतरता नहीं, न तो स्थायी विकास, न ही भरोसेमंद प्रशासनिक दृष्टिकोण।” वह यह भी जोड़ते हैं कि सार्वजनिक परिवहन के लिए दीर्घकालिक योजना बनाते समय केवल चुनावी माहौल को नहीं, बल्कि आर्थिक वास्तविकता को ध्यान में रखना चाहिए।

नगर पालिका ने आश्वासन दिया कि भविष्य में किराया निर्धारण के लिए ‘स्वतंत्र आर्थिक समीक्षक समिति’ स्थापित की जाएगी, जो सार्वजनिक सुनवाई और डेटा‑आधारित विश्लेषण के आधार पर निर्णय लेगी। अब सड़कों पर चल रहे ऑटो वाले, अपने पुराने मीटर को फिर से चलाते हुए, शायद यह सोच रहे हैं कि अगली बार कौन‑सी राजनीतिक लहर उन्हें फिर से अस्थिर कर देगी।

Published: May 6, 2026