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बेंगलुरु में जल संकट के समाधान के लिए कान्कादास की 68 झीलों की विरासत को मॉडल बनाते हुए नई योजना का प्रस्ताव
बेंगलुरु नगर निगम ने मंगलवार को पिछले दो हफ्तों में तीव्र बारिश के बाद बढ़ते जल अभाव को संबोधित करने हेतु एक नई जल‑संरक्षण योजना पेश की। योजना के मुख्य भाग के रूप में, प्रशासन ने इतिहास के प्रवर्तक क्रमशः 68 झीलों के निर्माणकर्ता कवि‑धर्मगुरु कान्कादास को प्रेरणा स्रोत घोषित किया, और उनके कार्य को शहर के जल‑इन्फ्रास्ट्रक्चर में दोहराने का लक्ष्य रखा।
नगर महानिदेशक राजेश शर्मा ने खुलासा किया कि इस योजना में ‘कान्कादास मॉडल’ के अन्तर्गत 12 प्रमुख क्षेत्रों में पुनः जल‑संकलन के लिये छोटे‑छोटे जल‑जमाव तालाबों का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक तालाब को स्थानीय समुदाय द्वारा सशक्त रख‑रखाव हेतु ग्रासरूट्स समिति में शामिल किया जाएगा, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक सहभागिता दोनों को बढ़ावा मिला।
परन्तु इस औँसत‑भरे सजगता के बीच, कई नगर अधिकारी और नागरिक संगठनों ने सवाल उठाया है कि पिछले दो दशकों में बेंगलुरु के कई मौजूदा जल‑स्रोत क्यों बेकार पड़े हैं, जबकि मौजूदा जल‑प्रबंधन विभाग में ‘रख‑रखाव‑अभाव’ की शिकायतें लगातार आती रही हैं। राष्ट्रीय जल परिषद की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, शहर के 30 प्रतिशत जल‑स्त्रोतों की क्षरण दर 2015‑2020 में 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है, और यह मुद्दा अभी भी प्रशासनिक कार्रवाई से दूर है।
शहरी योजना विभाग के अधीनस्थ सरजिला दत्त ने कहा, “कान्कादास की 68 झीलें केवल ऐतिहासिक तथ्य नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की गाथा हैं। हमें इनकी पुनरावृत्ति के लिए न सिर्फ तकनीकी निवेश, बल्कि निरंतर निगरानी और बजट में स्थायी आवंटन भी चाहिए।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बजट के अभाव और नियोजित समय‑सीमा में कई बार विलंब हुआ है, जिससे कई परियोजनाएँ ‘बिल्ड‑ऑन‑पेडर’ की स्थिति में फँसी हुई हैं।
स्थानीय निवासी अर्चना टंडन, जिन्होंने अपने मोहल्ले में जल‑टँकी के फ़ुटने के बाद पानी की कड़ी कमी झेली, ने टिप्पणी की, “इतिहासकार हमें कान्कादास के कार्य की सराहना करने को कहते हैं, परन्तु जब हम रोज़ बहते नल के लिये लम्बी लाइन में खड़े होते हैं, तो सराहना का क्या मतलब?” उनके जैसे कई नागरिकों ने सोशल‑मीडिया पर इस योजना को “रचनात्मक व्यंग्य” की श्रेणी में रखा है, जिससे नगर प्रशासन को सार्वजनिक उत्तरदायित्व को साकार करने की चुनौती मिलती है।
इन सब के बीच, नगर निगम ने कहा कि अगले दो महीनों में प्रथम चरण का प्रारम्भिक काम शुरू किया जाएगा, और सभी 12 तालाबों की प्रगति को डिजिटल डैशबोर्ड पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता को उजागर करता है, पर यह देखने की बात है कि इस पारदर्शिता को वास्तविक कार्यान्वयन में कितनी तेजी से बदला जा सकता है।
Published: May 6, 2026