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बीएमसी स्टैंडिंग कमेटी ने पिछले चार वर्षों के मेकेनिकल‑इलेक्ट्रिकल प्रस्तावों की जांच का आदेश दिया
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की स्टैंडिंग कमेटी ने अपने हालिया सत्र में निकटवर्ती नगर प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह मेकेनिकल और इलेक्ट्रिकल (एम&ई) विभाग द्वारा पिछले चार वर्षों में स्वीकृत सभी प्रोजेक्ट प्रस्तावों का विस्तृत परीक्षण करे। यह कदम अनियमितताओं, लागत वृद्धि और कार्यों में अनावश्यक देरी के आरोपों के मद्देनज़र उठाया गया है, जिनका स्वर नागरिकों के बीच लगातार बढ़ता जा रहा था।
कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि शहर में प्रकाश व्यवस्था, जल पंपिंग, एरियान लिफ्ट, एस्केलेटर और अन्य सार्वजनिक बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता को लेकर कई शिकायतें दर्ज हुई हैं। इन शिकायतों में अक्सर कार्य की अधूरी स्थिति, अनुचित सामग्री उपयोग और अनुबंध के मूल्य से काफी अधिक खर्च की बात उठाई गई। “चार साल में मंजूर किए गए प्रस्तावों की स्वच्छता पर अब प्रश्न उठ रहा है—अब जाँच का आदेश आया है,” उन्होंने कहा, जो प्रशासनिक लापरवाही के प्रति एक सूखा व्यंग्य था।
निर्देशानुसार, नगर प्रशासन को सभी संबंधित दस्तावेज़, बोली प्रक्रियाएँ, अनुबंधित रक़मे, तकनीकी विनिर्देश तथा कार्य प्रगति रिपोर्ट एकत्र करके स्वतंत्र ऑडिटिंग एजेंसी को प्रदान करनी होगी। इसके साथ ही एक विशेष उपसमिति का गठन कर, अधूरी या दोषपूर्ण कार्यों की सूची तैयार करके तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
इस पहल का प्रत्यक्ष प्रभाव नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ेगा। यदि जाँच से निर्माण मानकों में भारी चूक सामने आती है, तो सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, जल आपूर्ति और सार्वजनिक इमारतों की सुरक्षा से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स को फिर से मूल्यांकन किया जा सकता है। हालांकि, आलोचक कहते हैं कि इस तरह की बड़े पैमाने की जाँच में समय लग सकता है और मौजूदा सेवाओं में अस्थायी व्यवधान भी हो सकता है।
नगर प्रशासन ने आदेशों को “पूर्ण सहयोग” देने तथा “सभी सम्बंधित पक्षों के साथ समन्वय” स्थापित करने का आश्वासन दिया है। फिर भी, यह सवाल बना रहता है कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए proactive निगरानी तंत्र किस हद तक स्थापित किया जाएगा। बीएमसी की इस जाँच प्रक्रिया को देखते हुए, नागरिकों ने आशा जताई है कि पारदर्शिता और जवाबदेही की नई लकीरें निकट भविष्य में वास्तविक बनेंगी।
Published: May 6, 2026