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पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज, भर्ती विलंब पर विरोध में कई घायल

बिहार के राजधानियों में से एक, पटना में आज सुबह शिक्षक अभ्यर्थियों ने TRE‑4 भर्ती विज्ञापन के जारी न होने के विरोध में बड़े पैमाने पर रोड‑ब्लॉक किया। लगभग पाँच हज़ार उम्मीदवार, जो 46,595 शैक्षणिक पदों के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे, ने त्रिभुज मार्ग, एशिया रोड और बंगारहाट को घेरकर राज्य सरकार से तत्काल विज्ञापन माँगा।

पिछले महीने शिक्षा विभाग के उपप्रधान मंत्री ने मौखिक आश्वासन दिया था कि विज्ञापन दो हफ़्ते के भीतर जारी कर दिया जाएगा। लेकिन समय सीमा पार हो जाने के बाद भी कोई औपचारिक विज्ञापन नहीं आया, जिससे अभ्यर्थियों में निराशा की लहर दौड़ गई। कई युवा वर्ग ने सोशल मीडिया पर प्रशासकीय अकार्यक्षमता का मुक़ाबला करने के लिए इस तबले को चुनौतियों के रूप में उठाया।

प्रदर्शन के दौरान पटना पुलिस ने शांति स्थापना के नाम पर लाठीचार्ज किया। सेक्योरिटी फोर्सेज़ ने भी जल उपलब्धि की सीमा नहीं दी, जिससे प्रतिभागियों पर तेज़ लाठियों की मार हुई। स्थानीय अस्पतालों में दर्ज किया गया कि 27 लोगों को मामूली चोटों से लेकर एक व्यक्ति को गंभीर सर्जिकल हस्तक्षेप की आवश्यकता तक विभिन्न दर्जे की चोटें लगीं। अधिकांश घायल युवा छात्र व शिक्षक अभ्यर्थी ही थे, जिन्होंने रेजिस्टर्स के साथ अपने हक की मांग की थी।

पुलिस ने बाद में कहा कि प्रदर्शन व्यापक रूप से असंवेदनशील हो गया था, कुछ समूहों ने ध्वज उठाकर सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित किया। वहीं अभ्यर्थियों ने जवाब में बताया कि प्रदर्शन शांति‑पूर्ण था, परन्तु निरंतर सरकारी अनिच्छा के कारण लोग निराश होकर सतह पर उतर आए।

पटना जिला प्रशासन ने इस घटना को "अस्थायी व्यवधान" कहा और कहा कि राज्य सरकार जल्द ही TRE‑4 के विज्ञापन को प्रसारित करने के लिये कार्यकारी आदेश जारी करेगी। शिक्षा विभाग के माननीय सचिव ने कहा कि विशिष्ट कारणों से तकनीकी बाधाएं आई थीं, परन्तु अब सभी जरूरी मंज़ूरी मिल गई हैं और विज्ञापन अगले दो‑तीन दिन में सार्वजनिक किया जाएगा।

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की भविष्य की नीतियों पर प्रश्न उठाए हैं। कई नागरिक समूह ने सार्वजनिक मांग की कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयसारिणी को कानूनी बाध्यताएँ बनाकर फिर से नहीं दोहराया जाए। जबकि सरकार ने कहा कि यह एक दुर्लभ मामला है, लेकिन लाठीचार्ज का प्रयोग किसी भी लोकतांत्रिक प्रदर्शन में ‘अल्पविकल्प’ नहीं माना जा सकता, इस पर सामाजिक विश्लेषकों ने तान मारते हुए टिप्पणी दी।

Published: May 9, 2026