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Category: शहर

पटना मेट्रो के भूमिगत टनल कार्य में गति, नई स्टेशन के लिए नेहरा पथ पर मशीन की तैयारी

पिछले कुछ महीनों में पटना मेट्रो के भूमिगत नेटवर्क का एक प्रमुख खंड, मोइन‑उल‑हक स्टेडियम से गांधी मैदान तक, आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है। यह उपलब्धि शहर की लंबी‑लंबी जलरोधित परीकथाओं के बाद वास्तविक प्रगति का एक ठोस संकेत माना जा रहा है।

नगर निगम और राज्य सरकार ने इस भाग के निर्माण में लगभग दो‑तीन साल की देरी को ‘अनिवार्य तकनीकी कारणों’ के तहत थोड़ा-बहुत रिवर्स करने की कोशिश की, परंतु टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने अंततः इस अंतराल को कम किया। प्रशासन के तेज़‑तर्रार निर्णय‑लेने की तारीख अब स्पष्ट हो गई है: अगली ओर, वही मशीन नेहरू पथ की ओर रुख करेगी, जहाँ जून माह में नई भूमिगत स्टेशन की खुदाई शुरू होगी।

परियोजना के प्रशासक दावा करते हैं कि इस चरण से दैनिक ट्रैफिक जाम में कमी, यात्रा समय में घटाव और प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों की पहुंच में सुधार होगा। हालांकि, नागरिकों ने पहले ही संकेत कर दिया है कि सतह पर कार्य शुरू होने से अस्थायी बंदोबस्त और धूल‑धुंध की समस्या फिर से उभरेगी। इस संदर्भ में शहर के व्यस्त सदर्न रोड और कनॉट प्लेस के पास दो‑तीन महीनों तक लगातार सड़कों की दोबारा समीक्षा करना पड़ेगा।

सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो, पटना के उच्च गति वाले सार्वजनिक परिवहन के सपने को साकार करने का यह कदम प्रशासन के ‘सुरक्षा प्रथम’ के नारे के साथ थोड़ा‑बहुत तालमेल बिठा रहा है। आदर्श रूप में, टनल के अंत में स्थापित प्लेटफ़ॉर्म एस्केलेटर और सुदूर सुरक्षा कैमरे शहर को आधुनिक मेट्रो एरिया में बदल देंगे, पर वास्तविकता में रखरखाव और समय पर संचालन की गारंटी अभी दिलचस्प सवाल बनी हुई है।

सारतः, पटना मेट्रो की भूमिगत रेखाओं में इस नयी प्रगति को प्रशासनिक तत्परता की सराहना के साथ-साथ यह भी देखना होगा कि कार्य‑स्थल से उत्पन्न अस्थायी असुविधाओं को नागरिकों के दैनिक जीवन पर अधिक न बने। यह संतुलन अगर बनाए रखा गया, तो ही पटना को राष्ट्रीय मेट्रो मानचित्र में सार्थक स्थान मिलेगा।

Published: May 6, 2026