जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: शहर

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

प्रधानमंत्री मोदी की 11 मई को लखनऊ में रोडशो: प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 मई को लखनऊ में आयोजित होने वाले रोडशो की खबर ने शहर की सड़कों, पुलिस, और नगरपालिका के बीच जुड़ी कई तैयारियों को उजागर किया है। राजधानी में आधिकारिक बतौर कार्यक्रम की पुष्टि अभी बाकी है, पर स्थानीय प्रशासन ने पहले ही सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक नियमन और भीड़ नियंत्रण के लिए विस्तृत योजना तैयार कर ली है।

लखनऊ महापौर कार्यालय ने घोषणा की है कि प्रमुख मार्गों पर रडार, डीजल जनरेटर और अस्थायी शौचालय स्थापित किए जाएंगे। हालांकि, शहर की मौजूदा जल-सेवा और सफाई समस्याओं को अभी तक उचित समाधान नहीं मिला है। रोडशो के लिए बिछाए गए एम्प्लीफ़ायर्स और मंच की तैयारी के बीच, वही सड़कों पर अभी भी निर्माण कार्य जारी है, जिससे दैनिक यातायात में लगातार जाम की शिकायतें बनी हुई हैं।

पुलिस ने विशेष रूप से ट्रैफ़िक प्रबंधन हेतु ‘एक ही लेन-पर-एक वाहन’ प्रथा अपनाने की घोषणा की है, लेकिन पिछले साल कई बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान इसी तरह की व्यवस्था में गड़बड़ी के कारण सार्वजनिक असंतोष बढ़ा था। इस बार भी कई नागरिक समूहों ने सुझाव दिया है कि रोडशो के समय सार्वजनिक परिवहन पर अतिरिक्त सेवा प्रदान की जाए, पर वर्तमान में इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं दिख रहा।

शहर के व्यावसायिक वर्ग ने भी सहयोग का आश्वासन दिया है, जबकि छोटे व्यापारियों ने चिंता जताई है कि सड़क बंद होने से उनकी आय पर असर पड़ेगा। नजदीकी बाजारों में पहले से ही स्टॉल और अल्पकालिक विज्ञापन वाले बैनर लग रहे हैं, जिससे दर्शकों के लिए “राजनीतिक तमाशा” और “व्यापारी का स्टॉल” का मिश्रण बन रहा है।

एक ओर जहाँ प्रशासन के अधिकारियों को रोडशो को सफल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं की लापरवाही को भी इस अवसर पर तौलना कठिन नहीं। अगर कार्यक्रम के बाद भी जल पाइपलाइन की लीक, कचरा निस्तारण की कमी और असंगठित ट्रैफ़िक की समस्याएँ बरकरार रहती हैं, तो इस रोडशो की वास्तविक उपलब्धियों पर गंभीर सवाल उठेंगे।

संक्षेप में, प्रधानमंत्री के आगामी कार्यक्रम ने लखनऊ में प्रशासनिक तैयारियों को तीव्र कर दिया है, पर साथ ही नगर सेवाओं की मौजूदा कमजोरी को भी उजागर किया है। यह देखना बाकी है कि राजनैतिक चमक के बाद व्यवस्थित शहर व्यवस्था का कोई ठोस सुधार हुआ है या नहीं।

Published: May 7, 2026