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पूर्व वायुसेना अधिकारी चंद्रनाथ रथ की हत्या: नॉर्थ 24 परगना में राजनैतिक हिट‑एंड‑रन
नॉर्थ 24 परगना जिले में शाम के समय एक सापेक्ष साधारण घर से लौटते हुए पूर्व भारतीय वायुसेना अधिकारी एवं भाजपा नेता सुवेंदु आधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ का निःशस्त्र ठुकराव में नशे‑की‑सलामती समाप्त हुई। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, दो गुप्त वाहन रथ की चलती कार के आगे‑पीछे घुमते हुए अचानक घातक गोलीबारी कर, लक्षित शख्स को मार गिराया।
रथ को पार्टी के भीतर विस्तृत संगठनात्मक क्षमताओं और अटल निष्ठा के कारण अहम सहायक माना जाता था। उनका निधन न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि इस बात का संकेत भी देता है कि नॉर्थ 24 परगना में राजनीतिक दांव-परिवर्तन के साथ अपराध के स्वरूप में अभूतपूर्व परिवर्तन हो रहा है।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने तुरंत तैनाती नहीं की, बल्कि मौखिक रूप से "जांच शुरू" कर दिया। कई नागरिकों ने बताया कि पुलिस ने प्रथम प्रतिक्रिया में किनारे पर स्थित निचली सड़कों को बंद करने के बजाय, असंबंधित राहगीरों को मात्र एक छोटा नोटिस दिया। यही वह क्रम है, जहाँ अपराध स्थल पर सुरक्षा बिंदु स्थापित करने के बजाए, वहीं पर “लोकल ट्राइब्यून” के रूप में काम करने वाली कई राजनैतिक इकाइयाँ कार्यवाही को धीमा कर देती हैं।
इस वारदात पर विरोधी पक्षों ने सख़्त प्रकाशित करने का आह्वान किया, जबकि जिला अधिकारी के लिये यह एक नाजुक स्थिति बनी कि वह या तो अधिनायकवादी कार्रवाई दिखाए या फिर राजनीति‑प्रेरित शीर्षस्थ अधिकारियों के अधीनावली में बने रहें। पुलिस प्रमुख ने कहा कि मामले की जांच में सभी जरूरी प्रोटोकॉल अपनाए जाएंगे, परन्तु समय-सीमा को लेकर संकोच स्पष्ट है — “कुशल जांच के लिए चार‑पांच दिन चाहिए”, कहा। आलोचनात्मक आवाज़ें इस बात से असहमत हैं कि चार‑पाँच दिन ज्यादातर मामलों में “नीति‑बदलाव” की औपचारीकता के अंतर्गत ही गिनाए जाते हैं।
नागरिकों पर सबसे बड़ा असर यह है कि सड़क सुरक्षा का भरोसा टूट गया है। कई निवासियों ने बताया कि वे देर शाम के समय बाहर निकलने से कतराते हैं, और मूलभूत जीवन‑सहायता कार्यों में बाधा महसूस कर रहे हैं। यह स्थिति प्रशासनिक व्यावहारिकता और चुनावी रणनीति के बीच के अंतर को उजागर करती है, जहाँ सतही विकास कार्य पर अधिक धयान दिया जाता है, जबकि अपराध‑रहित शहरी वातावरण की न्यूनतम बुनियादी ज़रूरतें अनदेखी रह जाती हैं।
पिछले सप्ताह विलक्षण रूप से, जिले की वार्षिक “शहरी सुरक्षा संकल्प” बैठक में कहा गया था कि “रात में सड़क सुरक्षा को दो गुना बढ़ाया जाएगा”; परंतु इस मामले में सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति ने यह दिखा दिया कि उद्यमी व राजनैतिक वाक्यांशों की तुलना में निष्पक्ष पुलिस कार्यवाही ही असली सुरक्षा की कसौटी होनी चाहिए।
सुस्पष्ट जांच के लिये यह आवश्यक है कि न केवल स्थानीय पुलिस बल्कि राज्य‑स्तर के विशेष जांच इकाई एवं केंद्रीय एजेंसियों को भी समग्र रूप से शामिल किया जाए। इस तरह के कदम न केवल अपराधी तत्व को समाप्त करेंगे, बल्कि नागरिकों में प्रशासनिक भरोसा भी फिर से स्थापित करेंगे। वर्तमान में, नॉर्थ 24 परगना के जनजागरण का मुख्य संदेश यही है — “जांच में गति, सुरक्षा में निरंतरता, और सार्वजनिक सेवा में वास्तविक प्राथमिकता”।
Published: May 7, 2026