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पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवज्ञानम् ने एसआईआर ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दिया, कोलकाता में 1 लाख अपीलों को साफ करने में 4 साल लगेंगे
कोलकाता – विशेष तीव्र पुनरावलोकन (एसआईआर) ट्रिब्यूनल के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवज्ञानम् ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपनी पदस्थली से इस्तीफा दे दिया। उनका यह कदम शहर के चुनावी अभिलेखीय प्रक्रियाओं के इतिहास में एक आँकड़ा भी लेकर आया – 22 दिनों में 1,777 अपीलों को निपटाकर कई नागरिकों, ननियों और एक कांग्रेस प्रत्याशी को मतदान अधिकार वापस मिला।
हालांकि, न्यायाधीश शिवज्ञानम् ने यह भी कहा कि वर्तमान कार्य गति को देखते हुए शेष 1 लाख अपीलों को समाप्त करने में लगभग चार साल लगेंगे। यह अनुमान न केवल प्रशासनिक अक्षमता को उजागर करता है, बल्कि नागरिकों की लोकतांत्रिक भागीदारी पर दीर्घकालिक असर की चेतावनी भी देता है।
कोलकाता महानगरपालिका और राज्य चुनाव आयोग के बीच इस समस्या को सुलझाने के लिये त्वरित सुधारों की मांग बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रिब्यूनल के संसाधनों का पुनर्वितरण, प्रक्रिया के डिजिटलीकरण और अधिक न्यायाधीशों की नियुक्ति से इस बैकलॉग को घटाया जा सकता है। वरना, “ऐसी गति से तो पेंशन की उम्र तक भी मशीनरी को अपडेट करने का समय नहीं मिलेगा” – यह सूखा व्यंग्य इस बात को स्पष्ट करता है कि मौजूदा प्रणाली किस हद तक स्थिर हो गई है।
शिवज्ञानम् का इस्तीफा, जबकि व्यक्तिगत कारणों से प्रेरित था, असंतोष के संकेत के रूप में भी पढ़ा जा सकता है। नगर प्रशासन के लिए यह एक अवसर है कि वह अपनी कार्यप्रणाली का पुनर्मूल्यांकन करे, ताकि अगली बार जितनी तेज़ी से मतदान अधिकार वापस मिल सकें, उतनी ही गति से नागरिकों को सेवाएँ प्राप्त हों।
Published: May 9, 2026