जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: शहर

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

पुने के मेयर ने कहा: मई अंत तक जल आपूर्ति में कोई कट नहीं, भविष्य का निर्णय मोनसून पूर्वानुमान पर निर्भर

पुने नगर निगम के मेयर ने आज के सार्वजनिक बैठक में कहा कि इस महीने के अंत तक शहर में जल आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं आएगा। आगे की कोई कटौती तभी विचाराधीन होगी जब मोनसून के वास्तविक आँकड़े और जलाशयों के भंडारण की स्थिति दोनों अनुकूल न हों।

पुने ने पिछले कई वर्षों में अनियमित जल कटौती का सामना किया है, जिसके कारण नागरिकों को टैंकर लाने और बोतलबंद पानी खरीदने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। इस बार मेयर ने यह आश्वासन दिया है कि टैंकरों की तैनाती, लीकेज नियंत्रण और जल बचत अभियान जैसे कदमों से शहर के सामान्य 640 मिलियन लीटर प्रतिदिन की आपूर्ति को कम से कम 85 प्रतिशत क्षमता पर बनाए रखा जाएगा।

वर्तमान में शहर के प्रमुख जलाशयों – पुरना, जिंजूर, मडामगाव और भिमा – का औसत भंडारण स्तर लगभग 48 प्रतिशत है। मौसम विज्ञान विभाग ने इस वर्ष के मोनसून के लिए सामान्य वर्ष के 85 प्रतिशत आय के संकेत दिये हैं, परन्तु मौसमी अनिश्चितता को देखते हुए निगम ने "परिणाम आने पर" शब्दजाल का सहारा लिया है। यह रणनीति प्रशासनिक सतर्कता दिखाने के साथ-साथ संभावित जाँच-परख को भी टालती प्रतीत होती है।

नागरिकों की ओर से जल की उपलब्धता, सप्लाई के समय‑सारिणी में बदलाव और उच्च बिलों को लेकर कई शिकायतें दर्ज हुई हैं। जल निकासी प्रणाली में लगभग 30 प्रतिशत लीकेज के आंकड़े अभी भी अनसुलझे हैं, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है। नगरपालिका ने इस मुद्दे को हल करने के लिए "लीकेज न्यूनीकरण अभियान" की घोषणा की है, परन्तु वास्तविक कार्यान्वयन की गति अक्सर राजनीतिक कैलेंडर के साथ मिलती है।

मोनसून की पूर्वसूचना और जलस्तर की स्थिति को लेकर एकत्रित डेटा पर अंतिम निर्णय लेने की बात उजागर करती है कि जल नीति अभी भी बँझे हुए जाल में फँसी है, जहाँ वैज्ञानिक आंकड़े और प्रशासनिक कार्रवाई एक-दूसरे से टकराते हैं। यदि जल्द ही मोनसून अपने औसत आँकड़े नहीं लाता, तो मई‑जून के बीच जल कटौती का जोखिम फिर से उभर सकता है। तब तक नगरपालिका की तैयारी, टैंकरेस्वर्‍स, और नागरिकों की जल‑बचत आदतें ही इस शहर को जल संकट से बचाने का एकमात्र भरोसा बनेंगे।

Published: May 7, 2026